Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का खतरा एक बार फिर गहरा गया है। भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल के खरीक प्रखंड के दक्षिणी क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से भीषण तबाही का मंजर सामने आ रहा है। रविवार देर रात गंगा की उफनती धाराओं ने राघोपुर-शंकरपुर (काजीकोरैया) मुख्य जमींदारी बांध के लगभग 200 मीटर हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके कारण यह तटबंध पूरी तरह से जमींदोज हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते जल संसाधन विभाग के कैंप कार्यालय का आधा हिस्सा भी नदी में समा गया।
इस अप्रत्याशित कटाव की खबर फैलते ही खरीक दक्षिणी क्षेत्र के दर्जनों गांवों में हड़कंप मच गया है। स्थानीय ग्रामीणों के मन में वर्ष 2008 की प्रलयंकारी बाढ़ जैसी तबाही का खौफ साफ तौर पर देखा जा रहा है। बांध के ध्वस्त होते ही गंगा का पानी तेजी से रिहायशी और कृषि इलाकों की ओर बढ़ रहा है, जिससे स्थिति गंभीर होती जा रही है।
25 हजार से अधिक आबादी पर बाढ़ का सीधा खतरा
बांध टूटने के कारण खरीक प्रखंड की निचली पंचायतें जैसे राघोपुर, लोकमानपुर, उस्मानपुर और तुलसीपुर के कई गांवों पर जलमग्न होने का सीधा खतरा मंडरा रहा है। यदि गंगा के पानी की रफ्तार इसी तरह बनी रही, तो क्षेत्र की 25 हजार से अधिक आबादी सीधे तौर पर बाढ़ की चपेट में आ सकती है। बाढ़ के इस संभावित खतरे से भयभीत होकर ग्रामीणों ने ऊंचे स्थानों और राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है। लोग अपने घरों से अनाज, मवेशी और अन्य जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।
करोड़ों की फसलें बर्बाद होने की आशंका
इस आपदा ने खरीक क्षेत्र के किसानों की कमर तोड़ दी है। नवगछिया और खरीक इलाके की जीवनरेखा मानी जाने वाली केले की सैकड़ों एकड़ में लगी फसलें अब बाढ़ के पानी में डूबने की कगार पर हैं। इसके अतिरिक्त, किसानों द्वारा दिन-रात एक करके तैयार की गई धान, मक्का और हरी सब्जियों की फसलें भी पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका है। इस व्यापक नुकसान से किसानों को करोड़ों रुपये का बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है।
प्रशासन मुस्तैद, लेकिन ग्रामीण दहशत में
घटना की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता और फ्लड फाइटिंग टीम के अध्यक्ष भारी बल के साथ मौके पर कैंप कर रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने और बांध के शेष हिस्से को बचाने के लिए सैकड़ों मजदूरों को लगाया गया है। नदी की तेज धारा को मोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर बालू भरी बोरियां (एनसी बैग) और पेड़ों की बड़ी टहनियां गंगा में गिराई जा रही हैं।
मौके पर पहुंचे खरीक के अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रशासन जान-माल की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
हालांकि, गंगा की उफनती लहरों के सामने प्रशासनिक दावे फिलहाल बौने साबित होते दिख रहे हैं और क्षेत्र के ग्रामीण अभी भी गहरे दहशत में हैं। अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन नदी का रौद्र रूप ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है।







