Saran Panchayat News: सारण जिले की बेला पंचायत में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के औचक निरीक्षण ने स्थानीय प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर कर दी। पंचायत विकास दिवस के अवसर पर जिस पंचायत सरकार भवन को सुबह 10 बजे से खुला होना चाहिए था, वह 11 बजे तक भी बंद पाया गया। इस स्थिति को देखकर मंत्री ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

मंत्री के औचक निरीक्षण में खुली लापरवाही की पोल
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश रविवार को सारण जिले के दरियापुर प्रखंड स्थित बेला पंचायत पहुंचे थे। उनका यह दौरा पंचायत विकास दिवस के अवसर पर था, जिसका उद्देश्य ग्राम स्वराज को मजबूत करना और सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है। मंत्री के पहुंचने पर पंचायत सरकार भवन बंद मिला, जिससे ग्रामीण सरकारी सेवाओं से वंचित रहे। इस दौरान ग्राम सभा का आयोजन भी नहीं हुआ था, जो इस दिवस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
“गांव की सरकार कैसे चलेगी?” मंत्री ने मांगा स्पष्टीकरण
पंचायत सरकार भवन को बंद देखकर मंत्री दीपक प्रकाश ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सवाल उठाया, “जब भवन ही बंद रहेगा तो गांव की सरकार कैसे चलेगी?” मंत्री ने इस गंभीर लापरवाही के लिए बेला पंचायत की मुखिया, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और पंचायत सचिव से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है।
उनका कहना है कि पंचायत सरकार भवन ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ गांव स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है, लेकिन जब यह बंद रहेगा तो इसका उद्देश्य ही पूरा नहीं होगा।
“जब भवन ही बंद रहेगा तो गांव की सरकार कैसे चलेगी?”
– दीपक प्रकाश, पंचायती राज मंत्री
पंचायत विकास दिवस का महत्व और अनदेखी
बिहार सरकार हर महीने के अंतिम रविवार को सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत विकास दिवस मनाती है। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य जनभागीदारी बढ़ाना, सतत विकास लक्ष्यों की समीक्षा करना और ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करना है। यह आयोजन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक पंचायत सरकार भवन या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर होना अनिवार्य है।
इस बार की थीम ‘सामाजिक रूप से सुरक्षित एवं न्याय संगत पंचायत’ रखी गई थी। सारण जिले की कुल 318 पंचायतों में से अधिकांश में यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित हुआ, लेकिन बेला पंचायत में इसकी पूर्णतः अनदेखी की गई, जो चिंताजनक है।
मंत्री के इस औचक निरीक्षण और सख्त कार्रवाई के निर्देश के बाद स्थानीय प्रशासन पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है। यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में पंचायत सरकार भवनों की ऐसी अनदेखी नहीं होगी और ग्रामीणों को उनके अधिकार व सेवाएं समय पर मिल सकेंगी।








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