Bihar Punpun River: बिहार की राजधानी पटना से सटे इलाकों में पुनपुन नदी का जलस्तर अब खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। ‘बिहार पुनपुन रिवर’ में पानी का दबाव बढ़ने के साथ ही नदी किनारे की कनेक्टिविटी सड़क कई जगहों पर धंसने लगी है, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। बरैयाको पंचायत में करीब 70-75 मकानों पर सीधा खतरा मंडरा रहा है, जिनकी आबादी लगभग 250 बताई जा रही है।
पटना के सटे दानापुर में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से दियारा क्षेत्र में बाढ़ का खतरा गंभीर हो गया है. बुधवार शाम देवनानाला पर गंगा का जलस्तर 169.50 फुट रिकॉर्ड किया गया, जो खतरे के निशान से करीब ढाई फुट ऊपर है. पिछले 12 घंटे में लगभग डेढ़ फुट की वृद्धि हुई है और हर घंटे करीब तीन इंच पानी बढ़ रहा है.गंगा के उफान से गंगहरा, हेतनपुर, कासीमचक, पुरानी पानापुर, पतलापुर, मानस और अकिलपुर सहित दियारा की सात पंचायतों के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. निचले इलाकों के घरों में डेढ़ से दो फुट, सड़कों पर तीन से चार फुट और खेतों में चार से पांच फुट तक पानी भर गया है. प्रखंड मुख्यालय से संपर्क लगभग टूट गया है और आवागमन का एकमात्र सहारा नाव रह गया है.
पटना जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, पुनपुन नदी का जलस्तर वर्तमान में करीब 52 सेंटीमीटर तक पहुंच गया है, जो इसके डेंजर लेवल करीब 50 सेंटीमीटर से ऊपर है। पानी के लगातार बढ़ते दबाव के कारण नदी किनारे की मिट्टी खिसक रही है और सड़क धीरे-धीरे कटने लगी है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जलस्तर और बढ़ा, तो सड़क के साथ उनके घर भी नदी की चपेट में आ सकते हैं।
खतरे के निशान से ऊपर पुनपुन का जलस्तर, सड़क धंसने से बढ़ी चिंता
बरैयाको पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क पर कटाव शुरू हुआ है, उसके ठीक किनारे 70-75 मकान हैं। ये घर नदी के बिल्कुल करीब होने के कारण सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। ग्रामीण विनीत कुमार ने बताया कि 2019 के बाद पहली बार पुनपुन नदी में इस तरह का जलस्तर देखा जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया, तो घरों को भी भारी नुकसान हो सकता है।
रातभर जागकर निगरानी कर रहे ग्रामीण, मवेशियों को लेकर भी बढ़ी फिक्र
नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और सड़क के कटाव को देखते हुए ग्रामीण रातभर जागकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार बारिश और जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो गांव से बाहर निकलने का रास्ता भी बंद हो सकता है। इस स्थिति से बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को लेकर उनकी चिंता और बढ़ गई है। एक ग्रामीण ने बताया कि गाय को घर में बांधकर रखा गया है और ऐसे हालात में उसे बाहर निकालना भी जोखिम भरा है। पानी बढ़ने पर चारा और पशुओं को सुरक्षित रखने की समस्या भी गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों को ‘नेपाल जैसी त्रासदी’ का डर सता रहा है। उनका कहना है कि यदि रात में अचानक सड़क या नदी का किनारा टूट गया, तो घरों को संभलने का मौका नहीं मिलेगा। इसी आशंका के कारण कई लोग रातभर जागकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
एसडीएम-एसडीपीओ ने लिया जायजा, प्रशासन से तत्काल मदद की मांग
पुनपुन नदी के किनारे बनी सड़क के धंसने और घरों पर मंडराते खतरे की जानकारी मिलने के बाद एसडीएम और एसडीपीओ समेत कई अधिकारी प्रभावित इलाके का निरीक्षण करने पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को क्षतिग्रस्त हिस्से को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त हिस्से को बचाने के लिए बोरा और बांस लगाने का आश्वासन दिया है। ग्रामीण अब इंतजार कर रहे हैं कि सुरक्षा इंतजाम कब शुरू होते हैं।
एक तरफ जहां गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर पटना समेत कई इलाकों में चिंता बढ़ा रहा है, वहीं अब पुनपुन नदी के उफान ने दूसरी तरफ खतरा पैदा कर दिया है। नदी किनारे सड़क के धंसने से ग्रामीणों की चिंता सिर्फ जलस्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि संपर्क मार्ग और घरों की सुरक्षा को लेकर भी है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सड़क को सुरक्षित करने, कटाव रोकने और रात में निगरानी बढ़ाने की मांग की है ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।







