Bhagalpur News: भागलपुर के नामचीन शख्सियत और ‘धरती पकड़’ के नाम से मशहूर नागरमल बाजोरिया का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने राजधानी पटना में अंतिम सांस ली। नागरमल बाजोरिया ने अपने जीवनकाल में कुल 280 चुनाव लड़े, जो लोकतंत्र के प्रति उनकी अटूट आस्था और जीवटता का प्रतीक है।
चुनावी राजनीति में हार-जीत की परवाह किए बिना नागरमल बाजोरिया ने पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रपति पद तक के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के खिलाफ भी चुनावी मैदान में ताल ठोकी थी, जो उनके निर्भीक स्वभाव को दर्शाता है। भागलपुर निवासी नागरमल बाजोरिया ने कभी भी चुनाव लड़ने का मौका नहीं छोड़ा, भले ही परिणाम कुछ भी रहा हो।

कौन थे नागरमल बाजोरिया ‘धरती पकड़’?
नागरमल बाजोरिया का उपनाम ‘धरती पकड़’ उनकी चुनावी भागीदारी की जिद और हार न मानने वाले रवैये के कारण पड़ा था। उनका मानना था कि चुनाव लड़ना लोकतंत्र का उत्सव है, जिसमें हर नागरिक को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। उनकी यह जीवटता कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
लोकतंत्र के महापर्व में अटूट आस्था की मिसाल
नागरमल बाजोरिया की कहानी सिर्फ चुनाव लड़ने की नहीं, बल्कि लोकतंत्र में हर नागरिक की भूमिका को परिभाषित करने की भी है। उन्होंने दिखा दिया कि चुनावी मैदान में उतरना केवल जीतने के लिए नहीं होता, बल्कि अपनी आवाज उठाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए भी होता है। जिंदगी भर मैदान में डटे रहने वाले बाजोरिया को आखिर मौत ने ही पराजित किया।
भागलपुर की पहचान, पटना में ली अंतिम सांस
भागलपुर से गहरा जुड़ाव रखने वाले नागरमल बाजोरिया ने भले ही अपनी अंतिम सांस पटना में ली हो, लेकिन उनकी पहचान हमेशा भागलपुर के ‘धरती पकड़’ के रूप में ही रहेगी। उनका निधन चुनावी राजनीति के एक ऐसे अनूठे अध्याय का अंत है, जिसे शायद ही कोई दोहरा पाए।
नागरमल बाजोरिया का जीवन यह संदेश देता है कि लोकतंत्र में भागीदारी ही सबसे बड़ा सम्मान है, और हार-जीत से परे जनसेवा का भाव ही असली जीत है।







