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चौंक जाएंगे! बिहार में साइबर ठगों का नया खेल, 34 फर्जी कंपनियों से हो रही करोड़ों की ठगी, ऐसे रहें सावधान

Bihar Cyber Crime: बिहार में ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए तरीके सामने आए हैं। साइबर अपराधी अब व्यक्तिगत बचत खातों के बजाय फर्जी ट्रस्टों और शेल कंपनियों के चालू खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर क्राइम यूनिट ने 34 ऐसी संदिग्ध संस्थाओं की पहचान की है, जिनके जरिए करोड़ों रुपये के काले धन को सफेद करने का खेल चल रहा है।

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Bihar Cyber Crime: बिहार में साइबर अपराध से जुड़ी एक बड़ी जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों ने 34 ऐसी संदिग्ध फर्जी ट्रस्टों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और शेल कंपनियों का पता लगाया है, जिनके जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी से कमाए गए पैसों की हेराफेरी की जा रही थी। साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट (CCSU) इन संस्थाओं के बैंक खातों और उनके वित्तीय लेनदेन की गहनता से जांच कर रही है। यह जांच ऑनलाइन ठगी के बदलते तरीकों को उजागर करती है, जहां अपराधी अब व्यक्तिगत खातों के बजाय व्यावसायिक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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साइबर फ्रॉड के बदलते तरीके: बचत खाते से चालू खाते तक

जांच में सामने आया है कि साइबर ठगी करने वाले गिरोह पहले व्यक्तियों के बचत खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते थे। इसमें छात्रों और मजदूरों को 5,000 से 10,000 रुपये का भुगतान कर उनके बैंक खातों का उपयोग किया जाता था। हालांकि, बैंकों की बढ़ी हुई निगरानी और धोखाधड़ी अलर्ट सिस्टम के कारण ऐसे खातों की पहचान और उन्हें फ्रीज करना आसान हो गया है। इसी कारण, साइबर अपराधियों ने अब अपनी रणनीति बदल दी है।

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जांचकर्ताओं को संदेह है कि अब कई गिरोह फर्मों, ट्रस्टों और अन्य संस्थाओं के नाम पर खोले गए चालू और व्यावसायिक खातों का सहारा ले रहे हैं। इन खातों का उपयोग धोखाधड़ी से प्राप्त धन को नियमित व्यावसायिक लेनदेन जैसा दिखाने के लिए किया जाता है, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

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34 संदिग्ध संस्थाएं और उनका ‘फर्जी’ कारोबार

इस जांच के दायरे में कुल 34 संस्थाएं आई हैं, जिनमें 20 संदिग्ध NGO और ट्रस्ट तथा 14 शेल कंपनियां शामिल हैं। इन सभी के वित्तीय लेनदेन, पते और स्वामित्व विवरण की गहन जांच की जा रही है ताकि साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से उनके संभावित संबंधों का पता लगाया जा सके।

जांच के तहत आने वाली कुछ प्रमुख संस्थाएं:

  • उत्तर प्रदेश में ओंकार सेवा संस्थान
  • पटना से जुड़ी फर्मों में कस्टम आर्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड
  • कामाख्या लिमिटेड
  • कमला एंटरप्राइजेज
  • राधासन वेंचर प्राइवेट लिमिटेड
  • एसके एंटरप्राइजेज
  • हरि ओम एंटरप्राइजेज
  • मां भवानी ट्रेडिंग

जांचकर्ताओं का आरोप है कि इनमें से कई संस्थाओं की कोई वास्तविक व्यावसायिक उपस्थिति नहीं थी, बावजूद इसके वे कॉर्पोरेट बैंकिंग खाते बनाए हुए थे। कुछ ने वैध व्यावसायिक गतिविधि का दिखावा करने के लिए किराए के समझौते और कंपनी की मुहर जैसे दस्तावेजों का उपयोग किया। यह सभी आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं और अदालत में स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुए हैं।

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क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भी हो रही मनी लॉन्ड्रिंग

CCSU इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या विभिन्न प्रकार की साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को इन संदिग्ध संस्थाओं के चालू खातों में भेजा गया था। जांच में डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों और धोखाधड़ी वाले ऑनलाइन निवेश या शेयर-ट्रेडिंग योजनाओं सहित कई साइबर अपराधों से जुड़े मामले शामिल हैं। एक बार जब पैसा संदिग्ध खातों में आ जाता था, तो जांचकर्ताओं ने अन्य खातों और निकासी चैनलों के माध्यम से कई बाद के लेनदेन के संकेत पाए हैं।

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धन की आवाजाही को कई परतों के माध्यम से खंगाला जा रहा है, क्योंकि यह धन के मूल स्रोत को छिपाने का एक संभावित प्रयास हो सकता है। जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या संदिग्ध आय का एक हिस्सा पीयर-टू-पीयर लेनदेन के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया गया था। कुछ धन को USDT में परिवर्तित करके निजी क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के माध्यम से स्थानांतरित किया गया था। अधिकारी इन लेनदेन की जांच कर रहे हैं ताकि वॉलेट को नियंत्रित करने वाले व्यक्तियों की पहचान की जा सके और व्यापक साइबर अपराध नेटवर्क से उनके संबंधों का पता लगाया जा सके।

यह जांच केवल व्यक्तिगत लेनदेन को गलत काम का प्रमाण मानने के बजाय, वित्तीय निशान को फिर से बनाने पर केंद्रित है। इस तरह के खुलासे बिहार में साइबर अपराध के बढ़ते खतरे और अपराधियों द्वारा अपनाई जा रही नई-नई तरकीबों के प्रति सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। आने वाले समय में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे इन गिरोहों पर नकेल कसी जा सकेगी।

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