Bihar Industrial Development: बिहार में औद्योगिक विकास और रोजगार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य की औद्योगिक स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद बिहार देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की कतार में अपनी मजबूत जगह नहीं बना पाया है।
सुधाकर सिंह ने सवाल किया कि आखिर बिहार में बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियां क्यों नहीं लगीं और स्थानीय युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर क्यों नहीं पैदा हो सके। उन्होंने देश के औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य फैक्ट्री क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

बिहार में फैक्ट्रियों की कमी पर उठाए सवाल
राजद सांसद के अनुसार, बिहार इस तरह की प्रमुख औद्योगिक सूची में काफी पीछे दिखाई देता है। इसी अंतर को आधार बनाकर उन्होंने राज्य में औद्योगिक नीति और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। उनका कहना है कि बिहार को औद्योगिक राज्य बनाने के दावों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।
औद्योगिक नीति पर सरकार से मांगा जवाब
सुधाकर सिंह ने नीतीश कुमार की सरकार के लंबे कार्यकाल और केंद्र की मोदी सरकार के वर्षों को इस बहस से जोड़ते हुए कहा कि यदि केंद्र और राज्य में एक ही राजनीतिक गठजोड़ की सरकार रही, तो इसका फायदा औद्योगिक निवेश में पर्याप्त रूप से क्यों नहीं दिखाई दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के बावजूद बिहार में बिहार औद्योगिक विकास की गति धीमी क्यों रही।
अन्य राज्यों से क्यों पिछड़ गया बिहार?
उन्होंने देश के अन्य राज्यों के साथ तुलना करते हुए यह जानना चाहा कि जब दूसरे राज्य तेजी से औद्योगिक तरक्की कर रहे हैं, तो बिहार इस दौड़ में क्यों पिछड़ रहा है। सुधाकर सिंह के इन आरोपों ने राज्य में उद्योगों की स्थापना और रोजगार सृजन के प्रयासों की समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है।
सुधाकर सिंह के इन सवालों ने बिहार में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में सरकारों की प्रतिबद्धता पर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि इन आरोपों पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या भविष्य में राज्य की औद्योगिक तस्वीर बदलने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।







