Anamika Paswan: आम जनमत पार्टी को वित्तीय वर्ष 2023-24 में मिले 620 करोड़ रुपये के कथित चंदे को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान पर सवाल उठ रहे थे, जिसके बाद उन्होंने अपनी सफाई पेश की है। अनामिका पासवान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनका इस चंदे से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें जानबूझकर इस मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है।
620 करोड़ के चंदे पर अनामिका पासवान का बड़ा दावा
अनामिका पासवान के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2020 में आम जनमत पार्टी का गठन किया था और स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि 2022 में ही उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। अनामिका पासवान ने बताया कि पार्टी से संबंध खत्म करने के लिए उन्होंने अपने वकील से बात की थी और इस संबंध में हस्ताक्षर भी कर दिए थे।
उन्होंने कहा कि बाद में वकीलों के माध्यम से पार्टी को गुजरात के गौरव मिश्रा को हस्तांतरित कर दिया गया था। अनामिका पासवान ने यह प्रक्रिया प्लेन पेपर पर हस्ताक्षर करके पूरी की थी। उनका कहना है कि उस समय वह पार्टी से इस्तीफा दे रही थीं और पार्टी की जिम्मेदारी आगे किसी दूसरे व्यक्ति को दी जा रही थी।
पार्टी छोड़ने के बाद वित्तीय लेन-देन से इनकार
620 करोड़ रुपये के चंदे का आंकड़ा सामने आने के बाद अनामिका पासवान की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक था। इन सवालों के बीच, उन्होंने साफ किया है कि पार्टी छोड़ने के बाद उसके वित्तीय लेन-देन से उनका कोई संबंध नहीं रहा। उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोपों को गलत बताया है।
अनामिका पासवान ने दोहराया कि उन्हें इस मामले में जानबूझकर फंसाया जा रहा है। उन्होंने अपने बचाव के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की बात भी कही है।
निष्पक्ष जांच की मांग और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान ने कहा है कि वह इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगी। उन्होंने सरकार से भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि पार्टी के वित्तीय लेन-देन में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं।
अनामिका पासवान ने कहा, “मुझे इस पूरे मामले में फंसाया जा रहा है। इस चंदे से मेरा कोई संबंध नहीं है। सरकार को इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।”
साथ ही, उन्होंने पार्टी के हस्तांतरण और उसके बाद हुए आर्थिक लेन-देन की भी जांच की मांग की है। अनामिका पासवान की इन सफाईयों और जांच की मांग के बाद अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। यह विवाद बिहार की राजनीति में आगे और गहरा सकता है, जिससे कई और खुलासे होने की संभावना है।







