Bihar Congress: दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय के बाहर एक अप्रत्याशित नजारा दिखा। यह विरोध प्रदर्शन किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि खुद बिहार कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने किया। करीब 40 नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार और बिहार के लिए पार्टी के AICC प्रभारी कृष्णा अल्लावरु को उनके पदों से हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारी नेता राहुल गांधी से मिलकर उन्हें बिहार कांग्रेस की जमीनी हकीकत, संगठन की स्थिति और कार्यकर्ताओं की चिंताओं से सीधे अवगत कराना चाहते थे। हालांकि, दिल्ली में उनकी राहुल गांधी से मुलाकात संभव नहीं हो सकी। इसके बाद AICC मुख्यालय के प्रभारी कांग्रेस नेता मनीष चतरथ ने प्रदर्शनकारी नेताओं से मुलाकात कर उनका मांग-पत्र स्वीकार किया।
राजेश कुमार और अल्लावरु को हटाने की मांग क्यों?
बिहार कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता आनंद माधव ने इस विरोध प्रदर्शन पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “जब बिहार में बार-बार कोशिशों और बातचीत के बावजूद हमारी चिंताओं को नहीं सुना गया, तो हम दिल्ली आने को मजबूर हुए। हम अपने ही घर में अपने अभिभावकों से मिलने और उन्हें बिहार कांग्रेस की जमीनी हकीकत से अवगत कराने आए हैं।”
आनंद माधव ने असंतुष्ट नेताओं की प्रमुख मांगों को स्पष्ट किया। इसमें राहुल गांधी से तत्काल मुलाकात, समर्पित और वफादार कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ जारी किए गए सभी नोटिस और निष्कासन की कार्रवाई वापस लेना शामिल है। इसके साथ ही, उन्हें संगठन में उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर फिर से बहाल करने की मांग भी की गई।
माधव ने आगे कहा, “बिहार AICC प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार को तुरंत उनके पदों से हटाया जाना चाहिए, ताकि पार्टी में भरोसा बहाल हो सके और संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जा सके।”
दिल्ली में आमने-सामने आए कांग्रेस के दो गुट
दिल्ली में इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के आंतरिक कलह की तस्वीर और साफ हो गई। बिहार के कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता अल्लावरु और राजेश कुमार के समर्थन में भी सामने आ गए, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद प्रदेश कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में 43 नेताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।
सोमवार को हुए इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक अनिल सिंह, छत्रपति यादव, पूनम देवी और बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष जमाल अहमद भल्लू जैसे नेता भी शामिल थे, जिनके खिलाफ पार्टी ने पहले कार्रवाई की थी।
राजेश कुमार ने प्रदर्शनकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
पूरे मामले पर बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन करने वाले अधिकांश लोग बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदार थे।
राजेश कुमार ने कहा, “असल बात यह है कि जिन लोगों ने तथाकथित विरोध प्रदर्शन किया, वे सभी बिहार चुनाव में टिकट के दावेदार थे। चुनाव में टिकट देने के मानदंड AICC ने तय किए थे। ये लोग उन मानदंडों पर खरे नहीं उतरे, इसलिए उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप भी थे, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।”
कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि ये नेता पिछले कुछ महीनों से पटना में भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और मीडिया के सामने अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने संदेह जताया कि कुछ बीजेपी नेता भी उन्हें समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर सरसरी नजर डालने से पता चलता है कि वे राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को नहीं उठा रहे हैं। इनमें हल्द्वानी की वह घटना भी शामिल है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ किया गया था।” यह घटनाक्रम बिहार कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान को और गहरा कर रहा है।








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