Bihar Madhubani Painting: बिहार की विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग को अब राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलने जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग ने मधुबनी चित्रकला संस्थान से 50 मधुबनी पेंटिंग्स की मांग की है। यह पहल मिथिला की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ा सम्मान मानी जा रही है, जो स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देगी।
जिला जनसम्पर्क कार्यालय, मधुबनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग के प्रोटोकॉल अधिकारी ने एक पत्र के माध्यम से इन पेंटिंग्स की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चयनित कलाकृतियों में मधुबनी की पारंपरिक कला, संस्कृति और गौरवशाली विरासत की झलक साफ दिखनी चाहिए। इस निर्णय से जिले के कलाकारों की रचनात्मक प्रतिभा को देशभर में पहचान मिलेगी।


स्थानीय कलाकारों को मिलेगी प्राथमिकता, अंग्रेजी में होगा विवरण
निर्वाचन आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि इन 50 पेंटिंग्स की खरीद में मधुबनी कला के संवर्धन और संरक्षण से जुड़े स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को प्राथमिकता दी जाए। यह कदम न केवल कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त करेगा, बल्कि उनकी कला को भी व्यापक पहचान दिलाएगा।
प्रत्येक पेंटिंग के साथ उसकी विषय-वस्तु और कलात्मक विशेषताओं का एक संक्षिप्त विवरण अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित होने वाली इन कलाकृतियों के पीछे की कहानी और महत्व को आसानी से समझा जा सके। पेंटिंग्स की आपूर्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित बिल और इनवॉइस के साथ की जाएगी।
मिथिला की कला का राष्ट्रीय उड़ान
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मधुबनी की पारंपरिक चित्रकला को आधिकारिक प्रयोजन के लिए चुना जाना मिथिला की सदियों पुरानी कला परंपरा के प्रति एक गहरा सम्मान है। यह पहल मधुबनी चित्रकला की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को देश भर में और अधिक मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय कला और कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी तथा उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा। यह बिहार के कला जगत के लिए एक गौरवशाली क्षण है।







