Bihar Farakka Treaty: बिहार में फरक्का जल संधि को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस मुद्दे पर राज्य के हितों की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 2026 में इस संधि की 30 साल की अवधि पूरी होने पर इसका पुराने स्वरूप में नवीनीकरण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बेगूसराय में आयोजित ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम में संजय झा ने बिहार के पानी के अधिकार और हिस्सेदारी पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ‘हम लोग चुपचाप बैठ करके नहीं देख सकते हैं। सत्ता रहे या जाए इस मामले पर कोई भी समझौता नहीं हो सकता।’


फरक्का संधि से बिहार को नुकसान क्यों?
संजय झा ने बताया कि वर्ष 1996 में फरक्का जल संधि होने के बाद से बिहार को पानी से जुड़े कई संकटों का सामना करना पड़ा है। पिछले तीन दशकों में राज्य ने बाढ़ और सूखे दोनों की मार झेली है। उन्होंने कहा कि इस संधि की मौजूदा व्यवस्था बिहार के लिए हानिकारक साबित हुई है।
फरक्का जल संधि के कारण गंगा के पानी के बंटवारे का सीधा असर बिहार पर पड़ता है। झा के अनुसार, जनवरी से मई के बीच बक्सर जिले में गंगा नदी में औसतन केवल 400 क्यूमेक पानी उपलब्ध रहता है, जबकि संधि की शर्तों के तहत बिहार से आगे 1500 क्यूमेक पानी जाना अनिवार्य है। इस कमी को पूरा करने के लिए बिहार को अपनी दूसरी नदियों का पानी भी गंगा में छोड़ना पड़ता है, जिससे राज्य के आंतरिक जल स्रोतों पर दबाव बढ़ता है।
बढ़ती आबादी और बिहार की पानी की जरूरत
जदयू नेता ने राज्य की बढ़ती आबादी और जल जरूरतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1996 में जब संधि हुई थी, तब बिहार की आबादी लगभग सात करोड़ थी, जो अब बढ़कर करीब दोगुनी यानी 13 करोड़ हो चुकी है। इस बढ़ती आबादी के लिए पेयजल, कृषि के लिए सिंचाई और औद्योगिक विकास के लिए पानी की आवश्यकता भी बढ़ी है।
झा ने जोर देकर कहा कि राज्य को अपनी मौजूदा जरूरतों के हिसाब से पानी मिलना चाहिए। उन्होंने फरक्का जल संधि की व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि बिहार के जल अधिकार और हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सके।
नीतीश कुमार का पुराना विरोध और JDU का संकल्प
संजय झा ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुरुआत से ही फरक्का बराज और फरक्का जल संधि का विरोध करते रहे हैं। अब जब संधि की 30 साल की अवधि पूरी होने वाली है, तो बिहार के हितों को लेकर एक स्पष्ट और अडिग रुख अपनाना आवश्यक है।
जदयू ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बिहार की करीब 13 करोड़ आबादी और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए फरक्का जल संधि का पुराने स्वरूप में नवीनीकरण नहीं होने देगा। पार्टी इस मुद्दे पर बिहार के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस कार्यक्रम के दौरान संजय झा ने पार्टी के संगठनात्मक मामलों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि निशांत कुमार भी पार्टी में हैं और वर्तमान में मंत्री पद पर हैं। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में निशांत कुमार को और बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।







