Patna News: पटना के बापू टावर में चल रहे तीन दिवसीय गांधी फिल्म फेस्टिवल का दूसरा दिन गुरुवार को विशेष संवाद और फिल्म प्रदर्शन के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) और नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया के संयुक्त सहयोग से हो रहा है, जिसका मुख्य लक्ष्य नई पीढ़ी को महात्मा गांधी के विचारों और जीवन से परिचित कराना है।
गांधी फिल्म फेस्टिवल में दूसरे दिन का विशेष आकर्षण
गुरुवार को इस महोत्सव के दूसरे दिन टी.ए. अब्राहम द्वारा निर्देशित ‘ए बॉन्डलेस आइडियल’ और जाने-माने निर्देशक श्याम बेनेगल की चर्चित फिल्म ‘मेकिंग ऑफ महात्मा’ का प्रदर्शन किया गया। इन फिल्मों के माध्यम से दर्शकों को महात्मा गांधी के जीवन के विभिन्न पहलुओं और उनके आदर्शों को समझने का अवसर मिला।

इस अवसर पर आयोजित संवाद सत्र में फिल्म विशेषज्ञ प्रशांत रंजन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सिनेमा एक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है, जिसके जरिए गांधी के जीवन के विभिन्न आयामों को बखूबी चित्रित किया गया है। विख्यात रंगकर्मी और इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव तनवीर अख्तर ने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे नई पीढ़ी के लिए अत्यंत उल्लेखनीय बताया। वहीं, आलोचक एवं पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर तरुण कुमार ने कहा कि गांधी पर आधारित फिल्में देखना अपने आप में एक महत्वपूर्ण कार्य है।
बापू टावर में गांधी के आदर्शों का प्रसार
फेस्टिवल के निदेशक विनय कुमार ने कार्यक्रम में प्रदर्शित की जा रही फिल्मों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन बापू टावर पटना के प्रशाखा पदाधिकारी प्रत्यूष चंद्र मिश्रा ने किया। इस मौके पर बापू टावर के अवर सचिव अजय कुमार सिंह, उपनिदेशक ललित कुमार सिंह, संयुक्त सचिव किरण कुमारी और अवर सचिव अरुण कुमार पाठक सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कमला नेहरू गर्ल्स स्कूल और शास्त्रीनगर गर्ल्स स्कूल की छात्राएं और उनकी शिक्षिकाएं भी इस आयोजन में शामिल हुईं, जिससे युवा दर्शकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हुई। इस फेस्टिवल का तीसरा और अंतिम दिन 11 सितंबर को होगा, जिसमें महात्मा गांधी पर आधारित तीन और महत्वपूर्ण फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।
यह फिल्म फेस्टिवल न केवल महात्मा गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचा रहा है, बल्कि युवाओं को उनके अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों से प्रेरणा लेने का एक अनूठा अवसर भी प्रदान कर रहा है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन सांस्कृतिक और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और नई पीढ़ी को राष्ट्रपिता के आदर्शों से जोड़ने में सहायक होंगे।







