Bihar Politics: हाल के दिनों में बिहार की सियासत में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। गंगा जल बंटवारे और फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के भीतर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच स्पष्ट मतभेद सामने आए हैं। इसी राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भाजपा कोटे के अपने सभी मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक शुक्रवार शाम 5 बजे मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित होगी, जिसमें सभी भाजपा मंत्रियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
फरक्का जलसंधि पर JDU के तल्ख बयान
जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा लगातार फरक्का जलसंधि को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने बीते कुछ दिनों से लगातार यह आरोप लगाया है कि पिछले लगभग 30 सालों से बिहार का गंगा जल “चोरी” कर दूसरे राज्यों को दिया जा रहा है। संजय झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 1996 की फरक्का संधि बिहार के हितों के खिलाफ है और इसे वर्तमान स्वरूप में आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। उनके इन बयानों ने गठबंधन के भीतर असहजता बढ़ा दी है और यह मुद्दा बिहार की सियासत में चर्चा का केंद्र बन गया है।

मुख्यमंत्री की बैठक का सियासी अर्थ
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा बुलाई गई यह बैठक सियासी गलियारों में गहरी चर्चा का विषय बन गई है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर भाजपा की रणनीति, केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित करने और गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। सभी भाजपा मंत्रियों को बैठक में हर हाल में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है, जो इस बात का संकेत है कि मुख्यमंत्री इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहे हैं और पार्टी के भीतर एक स्पष्ट रुख तय करना चाहते हैं।
गठबंधन में बढ़ती तल्खी और आगे की राह
फरक्का जल बंटवारे पर जेडीयू और बीजेपी के बीच की यह तल्खी एनडीए गठबंधन के लिए एक नई चुनौती पेश कर रही है। एक तरफ जेडीयू बिहार के हितों को प्राथमिकता देते हुए संधि में बदलाव की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा को केंद्र सरकार के साथ समन्वय बिठाना है। इस बैठक के बाद भाजपा की ओर से फरक्का मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है और गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर सहमति कैसे बनती है, यह देखना दिलचस्प होगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और गहरा असर डाल सकता है।
यह बैठक न केवल फरक्का जलसंधि पर भाजपा के स्टैंड को स्पष्ट करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि गठबंधन के भीतर महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेदों को कैसे सुलझाया जाता है। इस बैठक के परिणामों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन की आंतरिक मजबूती और भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।







