Bihar Electricity Bill: देश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार सहित पूरे देश में बिजली के पुराने बकाए की वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि बिजली कंपनियां सामान्य तौर पर दो साल से अधिक पुराने बिल का बकाया नहीं वसूल सकतीं। यह निर्णय उपभोक्ताओं को लंबे समय से चले आ रहे विवादित बिलों से मुक्ति दिला सकता है।
दो साल से पुराने बिल पर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि बिजली की खपत से जुड़ा कोई भी बिल सामान्यतः दो साल के भीतर ही वसूला जाना चाहिए। यह उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं जहां कई सालों पुराने बिल अचानक बकाया के रूप में दिखा दिए जाते हैं। कोर्ट के इस फैसले से उपभोक्ताओं को अनिश्चितकालीन बकाए के बोझ से बचाया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “सामान्य तौर पर बिजली की खपत से जुड़ा कोई बिल दो साल के भीतर वसूला जाना चाहिए।”
किस शर्त पर हो सकती है पुराने बकाए की वसूली?
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम में एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है। अदालत ने कहा है कि यदि दो साल की अवधि के बाद भी बकाया वसूलना है, तो उस रकम को बिजली कंपनी द्वारा लगातार बाद के बिलों में बकाया के तौर पर दिखाया जाना अनिवार्य है। इसका मतलब है कि यदि कंपनी ने किसी बकाए को लगातार आपके मासिक बिल में ‘बकाया’ के रूप में दर्शाया है, तो उसे दो साल से अधिक समय बाद भी वसूला जा सकता है।
बिजली अधिनियम की धारा 56(2) को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति साफ की। अदालत ने कहा कि यह धारा हर स्थिति में दो साल बाद किसी सप्लीमेंट्री डिमांड पर पूर्ण रोक नहीं लगाती। यह कंपनियों के लिए एक स्पष्टीकरण है कि वे कब और कैसे पुराने बकाए की वसूली कर सकती हैं, बशर्ते उन्होंने उसे लगातार बिलों में शामिल किया हो। यह फैसला बिजली कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए पारदर्शिता बढ़ाएगा और विवादों को कम करने में मदद करेगा।








