Bihar Pitrupaksha Mela: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष महासंगम मेला 2026 की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में मेला के दौरान विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने बिहार प्रशासनिक सेवा (BPS) के दस अधिकारियों को गया समाहरणालय में प्रतिनियुक्त किया है। यह तैनाती मेला के सफल संचालन और शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का उद्देश्य और अवधि
पितृपक्ष महासंगम मेला 2026 के लिए प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं। बिहार प्रशासनिक सेवा के इन 10 अधिकारियों की ड्यूटी गया जिले के आसपास के पांच जिलों से लगाई गई है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेशानुसार, इन सभी अधिकारियों को 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक गया में अपनी सेवाएं देनी होंगी। उनकी मुख्य जिम्मेदारी मेला क्षेत्र में कानून-व्यवस्था का सुचारु संचालन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगी।

इन जिलों से आए हैं BPS अधिकारी
मेला की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए, प्रशासनिक अमले को मजबूत किया जा रहा है। जिन जिलों से इन अधिकारियों को गयाजी समाहरणालय में प्रतिनियुक्त किया गया है, उनमें अरवल, जहानाबाद, रोहतास, कैमूर और लखीसराय शामिल हैं। यह कदम दर्शाता है कि सरकार और प्रशासन पितृपक्ष महासंगम मेला को लेकर कितने गंभीर हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सामान्य प्रशासन विभाग ने अरवल, जहानाबाद, रोहतास, कैमूर, लखीसराय जिले में पदस्थापित बिप्रसे के 10 अधिकारियों को गयाजी समाहरणालय में प्रतिनियुक्त किया है। इन सभी को 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक गया में प्रतिनियुक्त किया गया है।
इस प्रतिनियुक्ति के माध्यम से, प्रशासन का लक्ष्य है कि पितृपक्ष महासंगम मेला 2026 न केवल सफलतापूर्वक संपन्न हो, बल्कि विधि व्यवस्था की दृष्टि से भी एक मिसाल कायम करे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि श्रद्धालुओं को पिंडदान और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा के करने का अवसर मिले।
पितृपक्ष मेला 2026: गया में अब नहीं बिछड़ेंगे बच्चे, प्रशासन ने की ऐसी शानदार तैयारी!
Gaya News: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला-2026 को लेकर गया जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाला यह पवित्र मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक गयाजी में आयोजित होगा। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पिंडदान करने आए तीर्थयात्रियों को ठहरने, आवागमन, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी कोई परेशानी न हो।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक और सुनियोजित इंतजाम किए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं को मेले के शुरू होने से पहले पूरी तरह तैयार रखने का लक्ष्य रखा गया है।
तीर्थयात्रियों के लिए व्यापक इंतजाम
श्रद्धालुओं के ठहरने की समस्या को दूर करने के लिए लगभग 2500 बेड क्षमता वाली एक विशाल टेंट सिटी तैयार की जा रही है। देवघाट सहित अन्य प्रमुख पिंडवेदी घाटों पर भी टेंट लगाए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालु धूप या बारिश से बचते हुए आराम से बैठकर पिंडदान कर सकें। मेले के दौरान अस्थायी पर्यटक सूचना केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां हेल्पलाइन नंबर, ई-रिक्शा सेवा और प्रशिक्षित गाइड उपलब्ध रहेंगे। इससे बाहरी तीर्थयात्रियों को घाटों और प्रमुख स्थलों तक पहुंचने में आसानी होगी।
फल्गु नदी के तट पर श्रद्धालुओं के लिए भव्य महाआरती का आयोजन भी किया जाएगा, जो मेले की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाएगा। इसके अतिरिक्त, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल, शौचालय और स्नानागार जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने का काम तेजी से चल रहा है।
बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
इस बार पितृपक्ष मेले में बच्चों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। पहली बार बच्चों के हाथ में क्यूआर कोड वाला बैंड बांधा जाएगा। यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगी जो छोटे बच्चों के साथ पिंडदान के लिए आते हैं।
यदि भीड़ में कोई बच्चा अपने परिजनों से बिछड़ जाता है, तो स्वयंसेवक बैंड को स्कैन करके बच्चे से जुड़ी जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। इससे उन्हें बच्चे को सुरक्षित रूप से उसके माता-पिता तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इन तैयारियों का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं को एक सहज और सुरक्षित अनुभव प्रदान करना है, बल्कि गया की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी बढ़ावा देना है। आने वाले दिनों में इन व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे पितृपक्ष मेला 2026 एक सफल आयोजन बन सके।







