Bihar Health News: बिहार के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य सचिव श्री कुमार रवि की अध्यक्षता में बापू टावर, पटना में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में डिजिटल ओपीडी, इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR), सर्जरी, रेफरल व्यवस्था, फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) की क्रियाशीलता, राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS), नियमित टीकाकरण, दवाओं की उपलब्धता और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
अनावश्यक रेफरल पर लगेगी रोक
समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने रेफरल व्यवस्था की निरंतर निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने अनावश्यक रेफरल पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि मरीजों को उचित स्वास्थ्य संस्थान में समय पर उपचार मिल सके। जिला अस्पतालों में उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं और जांच सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने के भी निर्देश दिए गए।
मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने पर जोर
अस्पतालों में जच्चा और बच्चा की मृत्यु दर को कम करने के लिए हर स्तर पर गंभीरता से काम करने को कहा गया। मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामलों की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। सचिव ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, आशा कार्यकर्ताओं का चयन लक्ष्य के अनुरूप करने पर भी जोर दिया गया।
अस्पतालों में दवा और सुविधाओं की समीक्षा
बैठक में सात निश्चय-3 योजना के तहत जिला अस्पतालों को अतिविशिष्ट चिकित्सा केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा से युक्त अस्पताल के रूप में विकसित करने की प्रगति की समीक्षा हुई। FRU की क्रियाशीलता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और आवश्यक जांच एवं उपचार सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। सभी स्वास्थ्य संस्थानों को NQAS मानकों के अनुरूप ढालने पर भी बल दिया गया। दवाओं के स्टॉक की नियमित जांच करने और एक्सपायर्ड दवाओं का नियमानुसार तत्काल निपटान करने के निर्देश भी दिए गए, साथ ही दवाओं की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
इन निर्देशों के बाद उम्मीद है कि बिहार के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आएगा। स्वास्थ्य विभाग इन निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी करेगा, जिससे आम जनता को बेहतर इलाज मिल सके।







