Bihar Daroga Exam: बिहार में दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की जांच तेज हो गई है। मई 2026 में 1799 दारोगा पदों के लिए हुई मुख्य लिखित परीक्षा में सामने आए अनियमितताओं के आरोपों की अब विशेष जांच टीम (एसआईटी) बारीकी से पड़ताल कर रही है। ईओयू ने परीक्षा केंद्रों से प्राप्त सीसीटीवी फुटेज और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) की रिपोर्ट का गहन अध्ययन शुरू कर दिया है।
CCTV फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां
जांच के दौरान पूर्णिया और गया के परीक्षा केंद्रों से मिले सीसीटीवी फुटेज में कई संदिग्ध बातें सामने आई हैं, जिन पर एसआईटी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ईओयू सूत्रों के मुताबिक, एक परीक्षा केंद्र पर एक वीक्षक को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए देखा गया है। इस फुटेज के सामने आने के बाद जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि परीक्षा केंद्र पर लगाए गए जैमर उस समय ठीक से काम कर रहे थे या नहीं। हालांकि, जैमर के काम न करने की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एसआईटी सीसीटीवी में दिख रही गतिविधियों के साथ-साथ परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं का सत्यापन कर रही है। टीम ने बीपीएसएससी द्वारा उपलब्ध कराए गए पूर्णिया और गया के परीक्षा केंद्रों के फुटेज का विश्लेषण किया है। आयोग ने इन दोनों जिलों में सामने आई गड़बड़ियों और उन पर की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा भी जांच एजेंसी को सौंपा है।
टॉप-20 परीक्षा केंद्रों पर EOU की नजर
जांच के दायरे में यह भी शामिल है कि क्या इसी तरह की गड़बड़ियां अन्य परीक्षा केंद्रों पर भी हुई थीं। जांच के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों पर 25 से 30 प्रतिशत तक अभ्यर्थियों के सफल होने की शिकायतें भी मिली हैं, जो सामान्य से काफी अधिक है।
ईओयू ने बीपीएसएससी से सबसे बेहतर परिणाम वाले टॉप-20 परीक्षा केंद्रों की सूची मांगी है। इस सूची और संबंधित परीक्षा परिणामों का भी जांच टीम अब गहन विश्लेषण करेगी, ताकि किसी भी तरह की संभावित धांधली की जड़ तक पहुंचा जा सके।
जैमर की कार्यप्रणाली पर सवाल
वीक्षक द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जैमर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यदि जैमर ठीक से काम कर रहा होता, तो मोबाइल फोन का उपयोग संभव नहीं होता। यह पहलू भी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो परीक्षा की तकनीकी सुरक्षा में संभावित खामियों को उजागर कर सकता है।
ईओयू इन सभी साक्ष्यों को अपनी समेकित रिपोर्ट में शामिल कर रही है। यह जांच न केवल बिहार दारोगा परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ईओयू की विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही इस पूरे मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा तय होगी।







