Bihar Van Devi Temple: बिहार की धरती सिर्फ इतिहास ही नहीं, बल्कि कई सदियों पुरानी लोककथाओं को भी समेटे हुए है। इन्हीं में से एक है बिहटा के पास घने जंगल के बीच मौजूद लगभग 400 साल पुराना मां वन देवी मंदिर।
अब इस मंदिर से जुड़ी रहस्यमयी कहानी बॉलीवुड तक पहुंच गई है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अभिनीत फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में इसी बिहार के प्राचीन मंदिर और इसकी लोककथा की झलक दिखाई जाएगी, जिसने स्थानीय लोगों के बीच हमेशा कौतूहल पैदा किया है।
जंगल के बीच 400 साल पुराना मां वन देवी मंदिर
पटना से लगभग 35 किलोमीटर पश्चिम में बिहटा के पास यह मां वन देवी का मंदिर स्थित है। इस मंदिर के आसपास अमहरा, राघोपुर और कंचनपुर जैसे कई गांव बसे हुए हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां वन देवी को जंगल की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है। ग्रामीणों का गहरा विश्वास है कि देवी इस जंगल और यहां रहने वाले सभी प्राणियों की रक्षा करती हैं। इस मंदिर की पूजा पद्धति भी इसे विशेष बनाती है; यहां देवी की पूजा किसी पारंपरिक प्रतिमा के रूप में नहीं, बल्कि एक पवित्र पिंड के तौर पर की जाती है।
सूर्यास्त के बाद क्यों था जंगल में प्रवेश वर्जित?
इस मंदिर से जुड़ी सबसे दिलचस्प और रहस्यमयी बात यह है कि स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, पहले इस जंगल में सूर्यास्त के बाद प्रवेश पर सख्त रोक थी। माना जाता था कि सूरज ढलने के बाद जंगल में कई रहस्यमयी घटनाएं होती थीं, जिनके चलते लोगों को अंदर जाने से मना किया जाता था। यही कारण है कि आज भी शाम के बाद जंगल की ओर न जाने की परंपरा से जुड़ी बातें यहां के बुजुर्गों द्वारा सुनाई जाती हैं। इस प्राचीन परंपरा ने हमेशा से ही इस क्षेत्र को एक अनूठी पहचान दी है।
बॉलीवुड फिल्म ‘द वन’ में बिहार की इस रहस्यमयी कहानी की झलक
अब इस स्थानीय रहस्यमयी कहानी को बड़े पर्दे पर देखने का मौका मिलेगा। जिस लोककथा की चर्चा सदियों से स्थानीय स्तर पर हो रही थी, वह अब बॉलीवुड की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ का हिस्सा बन गई है। इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म के लेखक-निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा और लेखक अरुणाभ कुमार ने बताया है कि उन्हें मां वन देवी मंदिर से जुड़ी इस लोककथा से ही फिल्म की कहानी लिखने की प्रेरणा मिली है। अरुणाभ कुमार के अनुसार, ‘मंदिर से जुड़ी कहानी और जंगल से जुड़ी रहस्यमयी परंपराओं ने उन्हें बहुत प्रभावित किया।’
अरुणाभ कुमार ने कहा, ‘मंदिर से जुड़ी कहानी और जंगल से जुड़ी रहस्यमयी परंपराओं ने उन्हें प्रभावित किया।’
यह घटना दर्शाती है कि कैसे बिहार की अनसुनी और प्राचीन कहानियां आज भी कला और सिनेमा के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। इस फिल्म के जरिए देश भर के दर्शक इस 400 साल पुराने रहस्य से रूबरू हो सकेंगे।








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