Bihar Cricket Association: बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) में लंबे समय से जारी प्रशासनिक गतिरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने संघ के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रिटायर्ड जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह को नया प्रशासक नियुक्त किया है। अब BCA के सभी प्रशासनिक और महत्वपूर्ण निर्णय सीधे तौर पर उनकी निगरानी में लिए जाएंगे, जिससे संघ के संचालन में जवाबदेही बढ़ेगी।
प्रशासक की भूमिका और अब क्या बदलेगा?
शीर्ष अदालत के ताजा निर्देशों के अनुसार, बिहार क्रिकेट एसोसिएशन का कोई भी प्रशासनिक या बड़ा निर्णय बिना नए प्रशासक की औपचारिक मंजूरी के लागू नहीं हो पाएगा। इसका सीधा अर्थ है कि संघ के दैनिक कार्यों में भी जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की सीधी देखरेख रहेगी। यह कदम BCA में व्याप्त अनियमितताओं को दूर करने और एक स्वच्छ कार्यप्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पहले भी हुई थी नियुक्ति, लेकिन…
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त 2026 को इस अहम पद के लिए ओडिशा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह को चुना था। यह नियुक्ति BCA लोकपाल की एक रिपोर्ट के आधार पर की गई थी, जिसमें जिला क्रिकेट संघों के कामकाज की जांच और नए सिरे से चुनाव कराने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह ने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह पद खाली रह गया था।
विवादों में घिरा रहा BCA
प्रशासक का पद खाली होने के बावजूद, बिहार क्रिकेट एसोसिएशन ने अपनी गतिविधियां जारी रखीं। इसी दौरान 18 सितंबर को प्रस्तावित आम सभा की बैठक को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रशासक की अनुपस्थिति में भी संघ धड़ल्ले से अपने कामकाज चला रहा है, जिस पर अदालत ने गंभीर संज्ञान लिया। इसी स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की नियुक्ति का आदेश जारी किया।
नए आदेश के लागू होने के बाद, BCA की प्रशासनिक प्रक्रिया में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। जिला क्रिकेट संघों के भीतर चल रहे विवादों और भविष्य में होने वाले चुनावों का संचालन अब नए प्रशासक की देखरेख में ही होगा। खेल जगत की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या क्रिकेट खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया भी प्रशासक के दायरे में आएगी, या उनका कार्य केवल प्रशासनिक फैसलों तक ही सीमित रहेगा, जिससे बिहार में क्रिकेट के विकास की दिशा तय होगी।







