Bihar Ward Sachiv: गुरुवार को पटना में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से दो महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडलों ने मुलाकात की। इस दौरान चौरसिया समाज ने राज्य में पान विकास आयोग के गठन की मांग उठाई, जबकि वार्ड सचिव संघ ने 1,14,691 पूर्व वार्ड सचिवों की सेवा बहाली और सम्मानजनक वेतनमान देने की अपील की। नीतीश कुमार ने दोनों ही पक्षों की बातें ध्यान से सुनीं और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पान विकास आयोग की पुरानी मांग
चौरसिया समाज के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सुभाष चन्द्र प्रसाद और नवीन कुमार उर्फ नगीना चौरसिया ने किया। उन्होंने सात सर्कुलर रोड स्थित नीतीश कुमार के आवास पर मुलाकात के दौरान अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा। प्रतिनिधियों ने मध्य प्रदेश के संस्थागत मॉडल का हवाला देते हुए बिहार में भी उसी तर्ज पर पान विकास आयोग बनाने की मांग रखी। उनका तर्क था कि पान केवल एक पारंपरिक उत्पाद नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक, सांस्कृतिक और औषधीय महत्व भी है। हालांकि, संरक्षण और संवर्धन के अभाव में पान की खेती से जुड़े लोग उत्पादन से लेकर बाजार तक कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
चौरसिया समाज के प्रतिनिधियों ने कहा, ‘संरक्षण और संवर्धन के अभाव में पान की खेती से जुड़े लोगों के सामने कई तरह की मुश्किलें हैं। उत्पादन से लेकर बाजार तक की समस्याओं का समाधान जरूरी है।’
पान विकास आयोग के गठन की मांग चौरसिया समाज की लंबे समय से लंबित मांगों में से एक है। जुलाई 2025 में हुए एक सम्मेलन में भी पान को कृषि का दर्जा देने, पान मंडी बनाने और पान विकास आयोग गठित करने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए थे। एक अलग आयोग बनने से पान उत्पादन, किसानों की समस्याओं और बाजार व्यवस्था पर केंद्रित होकर काम किया जा सकेगा।
1.14 लाख वार्ड सचिवों की सेवा बहाली की गुहार
वहीं, वार्ड सचिव संघ के प्रतिनिधिमंडल ने भी नीतीश कुमार से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। संघ की प्रमुख मांग 1,14,691 पूर्व वार्ड सचिवों की पुनर्बहाली है। प्रतिनिधियों ने सेवा समाप्त होने के बाद सामने आ रही परेशानियों की जानकारी देते हुए सेवा को स्थायी करने और सम्मानजनक वेतनमान देने की मांग रखी। उनका कहना था कि वार्ड सचिवों के परिवारों के भविष्य को देखते हुए सरकार को इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।
वार्ड सचिवों का यह मुद्दा नया नहीं है। बिहार विधानसभा के आधिकारिक दस्तावेजों में भी 1,14,691 वार्ड सचिवों के काम करने और उन्हें स्थायी करने व उचित मानदेय देने की मांग का उल्लेख मिलता है। हालांकि, पूर्व में सरकार की ओर से यह भी कहा गया था कि वार्ड सचिवों को वार्ड विकास में स्वैच्छिक सहयोग के लिए चुना गया था और उन्हें स्थायी करने का प्रावधान उस समय विचाराधीन नहीं था।
प्रतिनिधियों के अनुसार, नीतीश कुमार ने दोनों प्रतिनिधिमंडलों की बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और इस दिशा में उचित कार्रवाई के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। अब देखना होगा कि सरकार इन महत्वपूर्ण मांगों पर क्या रुख अपनाती है।








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