Odisha CEO VRS: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर उपजे विवादों के बीच ओडिशा के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) आर. संथान गोपालन ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया है। उनके इस फैसले ने राज्य में 17 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने को लेकर चल रहे सियासी विवाद को और गर्मा दिया है। गोपालन ने अपना VRS आवेदन सौंपा है, जबकि राज्य में मतदाता पुनरीक्षण का काम एक हफ़्ते पहले ही पूरा हुआ था।
हालांकि, गोपालन ने अपने इस कदम के पीछे निजी और स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का SIR प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। ओडिशा कैडर के 2001 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी गोपालन जुलाई 2024 से ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके पास आबकारी विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी है। उन्हें जून 2028 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन अब उनकी सेवा के लगभग 18 महीने शेष रहते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है।
17 लाख वोटरों के नाम हटे, गहराया विवाद
मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 21 सितंबर को ओडिशा की संशोधित चुनावी रोल प्रकाशित की गई थी। इस सूची में 3.16 करोड़ मतदाताओं के नाम दर्ज थे। विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने चुनावी रोल से लगभग 17 लाख नामों को हटाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बीजद ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान 27.50 लाख से अधिक मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया और दावा किया कि इस मामले को छिपाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने सीईओ पर मतदाता संबंधी आंकड़ों में ‘हेरफेर’ करने का भी आरोप लगाया था।
‘मैं निजी कारणों से वीआरएस लेना चाहता हूं। मैं निजी मामलों पर ध्यान देना चाहता हूं। मैं अपने परिवार पर ध्यान केंद्रित करूंगा और अपने बेटे की स्कूली शिक्षा पूरी होने तक भुवनेश्वर में ही रहूंगा।’
विपक्ष द्वारा इस्तीफे की मांग से जुड़े सवाल पर गोपालन ने कहा,
‘अगर वे खुश होना चाहते हैं तो उन्हें खुश होने दें। मैंने दो सितंबर को सरकारी सेवा में 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं और इसलिए वीआरएस लेने का फैसला किया।’
चुनाव आयोग पर भी उठे सवाल
गोपालन का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को भी कई राज्यों में SIR को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर आपत्ति जताई थी। इन असहमतियों में चुनावी रोल में नाम शामिल करने के लिए ‘फॉर्म 6’ में बदलाव, कामकाज का केंद्रीकरण, पश्चिम बंगाल में वोटर हटाने की अपील और गोवा में योग्य मतदाताओं को शामिल न कर पाना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे।
IAS-IPS अधिकारियों के VRS की लंबी लिस्ट
यह पहला मौका नहीं है जब ओडिशा में किसी वरिष्ठ अधिकारी ने सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया है या VRS लिया है। सितंबर महीने की शुरुआत में भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त जगमोहन मीणा (IPS अधिकारी) ने भी इस्तीफा दिया था, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया है। पिछले तीन वर्षों में, ओडिशा कैडर के चार IAS और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों ने इस्तीफा दिया है।
- पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के उत्तराधिकारी माने जाने वाले IAS अधिकारी वी.के. पांडियन ने अक्टूबर 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली थी और फिर राज्य में 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले BJD में शामिल हो गए थे।
- उनकी पत्नी सुजाता कार्तिकेयन, जो ओडिशा कैडर की IAS अधिकारी थीं, ने मार्च 2025 में इस्तीफा दिया और इस साल जून में BJD में शामिल हो गईं।
- 2013 बैच के IPS अधिकारी जगमोहन मीणा ने एक कॉर्पोरेट कंपनी में शामिल होने के लिए पिछले महीने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली।
- इस साल की शुरुआत में, IPS अधिकारी सीए रामदास (2025 बैच के प्रोबेशनर) ने हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान ही इस्तीफा दे दिया था।
आर. संथान गोपालन के VRS आवेदन पर अंतिम फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय लेगा। इस बीच, ओडिशा में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की उम्मीद है।







