Bihar Flood: गंडक नदी की विनाशकारी बाढ़ ने बिहार में जो तबाही मचाई, उसकी गंभीरता अब अंतरिक्ष से भी साफ दिख रही है। NASA Earth Observatory ने अपनी एक रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए गंडक के रौद्र रूप को उजागर किया है। इन तस्वीरों से स्पष्ट होता है कि कैसे नेपाल और भारत में नदी का जलस्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा, जिससे बड़े पैमाने पर जलभराव हुआ।
NASA Earth Observatory ने 2 अक्टूबर 2026 को ‘Rains Swamp the Gandak River’ शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में 20 सितंबर और 29 सितंबर 2026 की सैटेलाइट इमेज की तुलना की गई है। इन तुलनात्मक तस्वीरों में गंडक नदी के आसपास पानी का फैलाव और जलभराव का बढ़ता स्तर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिससे कई इलाके पानी में डूब गए।
बिहार में 60 साल का सबसे बड़ा सैलाब, NASA रिपोर्ट ने खोली गंडक बाढ़ की पूरी सच्चाई; डिप्टी CM ने दी बड़ी चेतावनी
Bihar Flood: पटना: बिहार में बाढ़ की स्थिति में भले ही सुधार के संकेत मिल रहे हों, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। उप मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने चेतावनी दी है कि नेपाल में दोबारा भारी बारिश हुई तो गंडक नदी का जलस्तर फिर बढ़ सकता है। इस बीच, NASA की एक रिपोर्ट ने इस बार की बाढ़ की गंभीरता को सामने ला दिया है, जिसने कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
NASA अर्थ ऑब्जर्वेटरी की रिपोर्ट के अनुसार, 27 सितंबर को नेपाल के देवघाट में गंडक नदी का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंच गया था। यह आंकड़ा 1960 के दशक में रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद से सबसे ऊंचा स्तर है। यह दिखाता है कि इस बार गंडक नदी में आया सैलाब कितना भयावह था।
गंडक में क्यों आया इतना पानी? NASA की रिपोर्ट ने खोली पोल
NASA ने नेपाल के जल एवं मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के हवाले से बताया है कि 24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल के पहाड़ी लुंबिनी और गंडकी प्रांतों में बहुत तेज बारिश हुई थी। इस मूसलाधार बारिश के साथ कई इलाकों में भूस्खलन भी हुआ, जिसका सीधा असर गंडक नदी (जिसे नेपाल में नारायणी नदी भी कहते हैं) के प्रवाह पर पड़ा। भारी बारिश के बाद नदी का जलस्तर नेपाल और भारत, दोनों जगह कई स्थानों पर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा।
देवघाट के अलावा, भारत में गंडक नदी के किनारे स्थित बगहा, डुमरियाघाट, रेवा घाट और लालगंज में भी नए उच्चतम जलस्तर दर्ज हुए हैं। NASA ने 20 सितंबर और 29 सितंबर की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना भी की है, जिनमें गंडक नदी के फैलाव में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। बाढ़ के दौरान नदी का दायरा काफी बढ़ गया था और कई निचले इलाकों में पानी फैल गया। कुछ जगहों पर तो तटबंधों के ऊपर से भी पानी बहने लगा, और कुछ स्थानों पर तटबंध टूटने की घटनाएं भी सामने आईं।
बिहार में दिखा भयावह असर, डिप्टी सीएम ने बताई चुनौती
उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि सरकार पिछले करीब दस दिनों से बाढ़ की स्थिति पर लगातार जानकारी ले रही है। उन्होंने कहा कि इस बार गंडक नदी में आई बाढ़ का स्वरूप सामान्य से बिल्कुल अलग था। आमतौर पर बिहार में बाढ़ का असर बाद के चरणों में गंगा के आसपास अधिक दिखता है, लेकिन इस बार नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद गंडक में अचानक पानी बढ़ गया। इसका असर उत्तर बिहार के कई इलाकों में देखा गया।
विजय कुमार चौधरी ने कहा, ‘फिलहाल हालात सुधर रहे हैं। लेकिन नेपाल में फिर भारी बारिश हुई तो गंडक नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है।’ उन्होंने यह भी बताया कि ‘नेपाल में हुई भारी बारिश का असर बिहार के गंडक क्षेत्र में तेजी से पहुंचा। इस वजह से गंडक का जलस्तर कई जगहों पर अब तक के ऊंचे स्तर तक गया।’
पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर समेत कई इलाकों में इस बाढ़ का प्रभाव पड़ा, जिससे बड़ी आबादी को जलभराव और मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 27 सितंबर को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाल्मीकिनगर बराज पर भी लगातार निगरानी बढ़ाई गई थी। उस दिन सुबह 11 बजे तक बराज पर करीब 4.24 लाख क्यूसेक जलश्राव दर्ज किया गया था। जल संसाधन विभाग ने क्षेत्रीय अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड में रहने और तटबंधों व संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए थे।
अब गंडक क्षेत्र में पानी घटने से राहत की उम्मीद बढ़ी है और देवघाट में भी जलस्तर में सुधार दर्ज किया गया है, जिसका असर बिहार में भी दिख रहा है। हालांकि, सरकार की चिंता नेपाल में होने वाली बारिश को लेकर बनी हुई है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बारिश होने पर उसका असर नीचे की ओर नदी के प्रवाह में पड़ सकता है। इस बार की बाढ़ ने नेपाल और बिहार के बीच नदी प्रवाह की कड़ी को भी उजागर किया है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बारिश का पानी तेजी से गंडक में पहुंचता है, और इसका असर बिहार के सीमावर्ती व मैदानी क्षेत्रों में दिखाई देता है। यही वजह है कि बिहार में बाढ़ की निगरानी केवल राज्य के भीतर के जलस्तर से नहीं, बल्कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश और नदी के स्तर से भी जुड़ी रहती है।
NASA की सैटेलाइट तस्वीरों ने भी इस बाढ़ के फैलाव को दर्ज किया है। रिपोर्ट में बगहा, अरेराज और फुलिया खांड समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ के पानी का विस्तार दिखाया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस बार गंडक में पानी बढ़ने की गति और उसका फैलाव कई इलाकों में सामान्य स्थिति से अलग रहा। फिलहाल बिहार में स्थिति में सुधार के संकेत हैं, लेकिन जल संसाधन विभाग की निगरानी जारी है। सरकार की नजर नेपाल के मौसम और गंडक के जलस्तर पर बनी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में नेपाल में बारिश की स्थिति बिहार के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
नेपाल की मूसलाधार बारिश बनी बाढ़ की वजह
रिपोर्ट के विश्लेषण से सामने आया है कि 24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल के लुंबिनी और गंडकी प्रांतों में मूसलाधार बारिश हुई थी। इस भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में भूस्खलन भी हुआ। नेपाल में गंडक नदी को नारायणी के नाम से जाना जाता है, और इस अत्यधिक बारिश के बाद इसका जलस्तर नेपाल के साथ-साथ भारत के कई हिस्सों में भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। परिणाम स्वरूप, नदी से सटे इलाकों में पानी तेजी से फैला और कई जगहों पर तो तटबंधों के ऊपर से बहने लगा, कुछ स्थानों पर तटबंध टूटने की घटनाएं भी दर्ज की गईं।
नेपाल के देवघाट में 27 सितंबर को गंडक नदी का जलस्तर 11.94 मीटर तक दर्ज किया गया। NASA की रिपोर्ट के अनुसार, 1960 के दशक में जलस्तर की रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर था। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस बार नेपाल में गंडक का जलस्तर सामान्य मानसूनी उतार-चढ़ाव से कहीं अधिक था, जो एक असाधारण स्थिति थी।
बिहार में रिकॉर्ड जलस्तर और व्यापक असर
भारत के कई इलाकों में भी गंडक नदी ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। बगहा, डुमरियाघाट, रेवा घाट और लालगंज जैसे स्थानों पर नए उच्चतम जलस्तर दर्ज किए गए। इसका सीधा और गंभीर असर बिहार के कई जिलों में देखने को मिला। पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर के विशाल क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फैल गया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने NASA की इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
NASA की रिपोर्ट इस बार की बाढ़ की असाधारण स्थिति को रेखांकित करती है। गंडक में इस बार का जलप्रवाह सामान्य मौसमी परिस्थितियों जैसा नहीं था। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हुई लगातार भारी बारिश का सीधा असर बिहार में दिखाई दिया। राज्य सरकार बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। वैज्ञानिक और सैटेलाइट आधारित आंकड़े बाढ़ की स्थिति को समझने में मददगार हैं। इससे पानी के फैलाव और प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया जा सकता है।
चौधरी के बयान ने इस बात की पुष्टि की कि इस बार की बाढ़ सामान्य नहीं थी, बल्कि नेपाल में हुई अप्रत्याशित बारिश का परिणाम थी।
गंडक नदी का एक बड़ा जलग्रहण क्षेत्र नेपाल में स्थित है। यही कारण है कि नेपाल में होने वाली भारी बारिश का सीधा और गंभीर प्रभाव बिहार तक पहुंचता है। NASA की सैटेलाइट तस्वीरें और रिपोर्ट ने इस तथ्य को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया है, जिससे भविष्य में बाढ़ प्रबंधन और राहत कार्यों की योजना बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। यह रिपोर्ट हाल ही में बिहार में आई गंडक बाढ़ की स्थिति को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हुई है।








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