Mokama Rail Bridge: बिहार के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। मोकामा में गंगा नदी पर बने नए डबल लाइन रेल पुल से ट्रेनों का परिचालन शुरू हो गया है। करीब नौ वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह पुल चालू हुआ है, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल संपर्क को अभूतपूर्व मजबूती मिली है। रविवार देर रात 12:10 बजे अलीपुरद्वार से दिल्ली जा रही 15483 सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस इस नए पुल को पार करने वाली पहली ट्रेन बनी।
रेलवे के अनुसार, इस पुल के शुरू होने से मोकामा रेल खंड की क्षमता लगभग 2.5 गुना बढ़ जाएगी। अब इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर कुल तीन रेल लाइनों से ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा, जिससे यात्री और मालगाड़ियों दोनों को गति मिलेगी।
मोकामा गंगा रेल पुल चालू: अब बिहार में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, यात्रियों को मिलेगी सीधी राहत!
Bihar Rail Bridge: पटना से मोकामा के रास्ते सफर करने वाले रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। गंगा नदी पर मोकामा में राजेंद्र पुल के समानांतर बने नए डबल लाइन रेल पुल पर अब ट्रेनों का परिचालन शुरू हो सकेगा। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस), पूर्वी सर्किल, कोलकाता के गुरु प्रकाश ने 3 और 4 अक्टूबर को इस नव-निर्मित पुल के साथ राजेंद्र पुल-हाथीदह, टाल और रामपुर डुमरा स्टेशनों का गहन निरीक्षण किया था।
विद्युतीकरण के साथ दोहरीकरण परियोजना के तहत बने इस पुल का निरीक्षण मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए किया गया। पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया, ‘सीआरएस से प्राधिकार मिलते ही नवनिर्मित पुल से ट्रेन परिचालन संभव हो गया है। इससे यात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी।’
2400 करोड़ की लागत से बना अत्याधुनिक पुल
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह नया रेल पुल लगभग 2400 करोड़ रुपये की विशाल लागत से तैयार किया गया है। यह मौजूदा राजेंद्र पुल के समानांतर पटना छोर की तरफ करीब 50 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस पर दोहरी रेल लाइन का निर्माण किया गया है, जिससे एक साथ दो ट्रेनें गुजर सकेंगी।
पूरी परियोजना लगभग 15.5 किलोमीटर लंबी है, जिसमें गंगा नदी पर 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल भी शामिल है। मुख्य पुल में 17 स्टील स्पैन और 3.6 किलोमीटर लंबा रेल वायाडक्ट बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, आठ लघु पुल, दो सड़क ऊपरी पुल और तीन रेल ओवर रेल का निर्माण भी इस परियोजना का हिस्सा है।
उत्तर-दक्षिण बिहार की मजबूत होगी कनेक्टिविटी
नए पुल की योजना इस तरह से बनाई गई है कि मौजूदा पुल के एप्रोच में कम से कम बदलाव करना पड़े। पुल के दोनों छोरों को मौजूदा स्टेशनों से जोड़ा गया है। उत्तरी दिशा में हाथीदह, टाल और रामपुर डुमरा से इसका सीधा कनेक्शन है, जबकि दक्षिणी दिशा में राजेंद्र पुल और बरौनी से यह जुड़ेगा।
नए डबल लाइन पुल के चालू होने के बाद भी पुराने राजेंद्र सेतु से रेल परिचालन जारी रहेगा। इस तरह इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर कुल तीन रेल लाइनों का प्रावधान हो जाएगा। यह व्यवस्था उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल आवागमन के लिए एक अतिरिक्त और सुगम मार्ग उपलब्ध कराएगी। इस पहल से रेल परिचालन को सुगम बनाने के साथ ही उत्तर-दक्षिण बिहार और देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों के बीच रेल कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व मजबूती आने की उम्मीद है। इससे यात्री और मालगाड़ियों दोनों के परिचालन में महत्वपूर्ण सुधार होगा।
रेलवे ट्रैफिक में ढाई गुना वृद्धि का अनुमान
इस परियोजना के पूरा होने से रेल मार्ग की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रेलवे के अनुमानों के अनुसार, इस मार्ग पर रेलवे ट्रैफिक में करीब 2.5 गुना तक की वृद्धि हो सकती है। माल ढुलाई के समय और लागत में कमी आने से व्यापारिक गतिविधियों को भी सीधा लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
2400 करोड़ की लागत, 110 KM प्रति घंटे की रफ्तार
नए डबल लाइन रेल पुल का निर्माण पुराने राजेंद्र सेतु के ठीक समानांतर 2400 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। वर्ष 2016 में इसकी आधारशिला रखी गई थी और निर्माण कार्य 2018 में शुरू हुआ था। पुल पर स्टील के स्लीपर लगाए गए हैं, जिससे ट्रेनें अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकेंगी।
इस पूरी परियोजना की लंबाई लगभग 15.5 किलोमीटर है, जिसमें गंगा नदी के ऊपर 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य रेल पुल शामिल है। मुख्य पुल में नदी पर 17 स्टील स्पैन बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, परियोजना में 3.6 किलोमीटर लंबा रेल वायडक्ट, आठ छोटे पुल, दो रोड ओवरब्रिज और तीन रेल ओवर रेल का निर्माण भी किया गया है, ताकि रेल लाइन को सड़क और अन्य रेल लाइनों के ऊपर से सुरक्षित रूप से गुजारा जा सके।
रेल संरक्षा आयुक्त, पूर्वी सर्किल कोलकाता के गुरु प्रकाश ने तीन और चार अक्तूबर को नए पुल का गहन निरीक्षण किया था। उनके द्वारा परिचालन की अनुमति मिलने के बाद ही रेलवे ने ट्रेनों का संचालन शुरू किया है।
पुराने राजेंद्र सेतु पर भी जारी रहेगा परिचालन
नया डबल लाइन पुल चालू होने के बावजूद, पुराने राजेंद्र सेतु पर रेल परिचालन पहले की तरह जारी रहेगा। अब पुराने पुल की एक लाइन और नए पुल की दो लाइनों को मिलाकर इस रेल खंड पर कुल तीन रेल लाइनों की सुविधा उपलब्ध हो गई है। तीन रेल लाइनों के कारण ट्रेनों को एक-दूसरे के गुजरने का इंतजार कम करना पड़ेगा, जिससे यात्री और मालगाड़ियों दोनों के परिचालन में तेजी आएगी।
बिहार के कई जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
इस नए रेल पुल से पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, छपरा और समस्तीपुर समेत कई जिलों के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। उत्तर बिहार से दक्षिण बिहार और पटना की ओर आने-जाने वाली ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल लाइनें मिलने से परिचालन अधिक व्यवस्थित और सुगम होगा।
- पटना
- बेगूसराय
- खगड़िया
- मुंगेर
- छपरा
- समस्तीपुर
यह पुल उत्तर-पूर्वी राज्यों की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त क्षमता मिलने से माल परिवहन को भी नई गति मिलने की संभावना है। नए पुल के कारण पुराने राजेंद्र सेतु पर रेल यातायात का दबाव कम होगा, जिससे उसके रखरखाव और संरचनात्मक सुरक्षा के कार्यों के दौरान भी रेलवे के पास ट्रेनों के परिचालन को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
झाझा-पटना दिशा में ट्रेनों का परिचालन और सुगम बनाने के लिए पुल के दोनों ओर रेल ओवर रेल भी बनाए गए हैं, जिससे ट्रेनों को अनावश्यक रूप से मुख्य लाइन पर रोकने की आवश्यकता कम होगी।








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