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बिहार के स्वास्थ्य में ‘ निशांत ‘ बदलाव! राज्यपाल भी हुए मुरीद, मरीजों को ऐसा क्या मिल रहा सीधा फायदा – बिहार बना नंबर 1

Bihar Health Minister Nishant: मंत्री निशांत की सक्रियता से बिहार के अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार, टीबी मरीजों को बड़ी राहत, आय सीमा बढ़ी और मुफ्त दवा में बिहार देश में नंबर 1.

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Bihar Health Minister Nishant: बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं में इन दिनों बड़े और सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने पदभार संभालते ही अस्पतालों की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। वे लगातार अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं और मरीजों से सीधे बात करके उनकी समस्याओं को समझ रहे हैं। उनका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटी बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बड़े शहरों की ओर न भागना पड़े, जिसके लिए जिला स्तर पर मेडिकल सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। अनावश्यक रेफरल रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग कड़े कदम उठा रहा है, और मंत्री निशांत की इस कार्यशैली की हर तरफ प्रशंसा हो रही है।

हाल ही में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने भी खुले मंच से उनके काम की सराहना की। उन्होंने ‘टीबी मुक्त बिहार’ अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य मंत्री निशांत और स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि को बधाई दी। राज्यपाल ने मोबाइल एक्स-रे मशीनों से मरीजों की जांच को एक प्रभावी कदम बताया।

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राज्य में ‘टीबी मुक्त बिहार’ अभियान के तहत टीबी मरीजों को खोजने के लिए अब तक साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान लगभग 3 लाख 97 हजार टीबी मरीजों की पहचान की गई है, और उनका इलाज शुरू हो चुका है। सरकार ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत इन मरीजों को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक मदद भी दे रही है। इसके अतिरिक्त, निक्षय मित्रों की सहायता से 66 हजार से अधिक टीबी मरीजों को फूड बास्केट भी वितरित किए गए हैं, जिससे उन्हें पोषण संबंधी सहायता मिल सके।

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अस्पतालों में बुनियादी ढांचे का विस्तार, बढ़ी सुविधाएं

राज्य के अस्पतालों में बुनियादी ढांचे को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जिला अस्पतालों में 105 नए आईसीयू बेड और 70 वेंटिलेटर चालू किए गए हैं, जिससे गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज मिल पा रहा है। अनुमंडलीय अस्पतालों में भी डायलिसिस की सुविधा का तेजी से विस्तार हो रहा है। कुल 55 अनुमंडलीय अस्पतालों में से अब तक 25 में मरीजों को डायलिसिस की सुविधा मिलने लगी है, जिससे उन्हें दूर नहीं जाना पड़ रहा।

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बड़े चिकित्सा संस्थानों की बात करें तो पटना के पीएमसीएच (PMCH) में सेंट्रलाइज्ड रेडियोलॉजी सिस्टम शुरू हो गया है। यहां अब मरीजों को सिटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं एक ही जगह पर मिल रही हैं। वहीं, आईजीआईएमएस (IGIMS) में मॉड्यूलर नेत्र ऑपरेशन थिएटर और अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट बनकर तैयार है। मुजफ्फरपुर के होमी भाभा कैंसर अस्पताल में भी नई सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

चिकित्सा स्टाफ की कमी दूर, नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी

स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए मेडिकल स्टाफ की कमी को भी दूर किया गया है। सरकार ने 200 विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल कॉलेजों में 142 चिकित्सा शिक्षकों की नई नियुक्तियां की हैं। इसके साथ ही, अस्पतालों में 2,219 तकनीकी कर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें ओटी असिस्टेंट, ईसीजी टेक्नीशियन और एक्स-रे टेक्नीशियन प्रमुख रूप से शामिल हैं। नए मेडिकल स्टाफ के आने से अस्पतालों में सर्जरी और जांच की गति में काफी वृद्धि हुई है। विभाग के अनुसार, पिछले तीन महीनों के भीतर 4.14 लाख से अधिक मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया गया और लगभग 19 हजार मरीजों की सफल सर्जरी भी की गई।

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मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। छपरा और समस्तीपुर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नए मेडिकल कॉलेज शुरू करने की मंजूरी दे दी गई है, जिससे राज्य में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी।

मरीजों को आर्थिक मदद और मुफ्त दवा वितरण में बिहार नंबर 1

मरीजों को आर्थिक मदद पहुंचाने के नियमों में भी बड़ी राहत दी गई है। मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष का लाभ लेने के लिए वार्षिक आय सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे अधिक जरूरतमंद परिवार सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाइयां बांटने के मामले में बिहार पिछले 23 महीनों से देश भर में पहले नंबर पर बना हुआ है, जो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की एक बड़ी उपलब्धि है।

रेफरल से पहले अस्पतालों में बिस्तरों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी शुरू कर दी गई है, जिससे मरीजों को सही समय पर सही अस्पताल में भर्ती कराया जा सके। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिला अस्पतालों में मरीजों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। मधेपुरा में सबसे ज्यादा 8,037 मरीज आईपीडी में भर्ती हुए, जबकि पटना और वैशाली में भी भारी संख्या में सर्जरी रिकॉर्ड की गई हैं। स्वास्थ्य मंत्री निशांत के इन जमीनी प्रयासों से बिहार के हेल्थ सेक्टर की तस्वीर तेजी से बदलती हुई दिखाई दे रही है, जिससे आम लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है।

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