Bihar Sand Mining: बिहार में बालू खनन (Bihar Sand Mining) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में 16 अक्टूबर से बालू घाटों का खनन एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। खान एवं भूतत्व विभाग ने इसे लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिया है। विभाग ने उन सभी बालू घाटों की समीक्षा करने का फैसला लिया है, जिनकी नीलामी तो हो चुकी है लेकिन वे अब तक संचालित नहीं हो पाए हैं। इन घाटों के संचालन में आ रही हर अड़चन को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
बालू घाटों के संचालन की राह में क्या थी बाधाएं?
विभाग की ओर से की जाने वाली समीक्षा बैठक में कई अहम बिंदुओं पर चर्चा होगी। इसमें घाटों के खनन की योजना, प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी सहमति, पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) और भुगतान से जुड़े लंबित मामले शामिल हैं। इसके साथ ही बंदोबस्तधारी के साथ हुए अग्रीमेंट की मौजूदा स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। सभी कमियों को दूर करने के बाद ही घाटों का संचालन शुरू करने का निर्देश दिया गया है। विभाग का लक्ष्य है कि 16 अक्टूबर से अधिक से अधिक बालू घाट संचालित हो सकें।
विभाग के अधिकारियों को यह आदेश दिया गया है कि यह प्रक्रिया सिर्फ कागजों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। बल्कि घाटों के वास्तविक संचालन की लगातार निगरानी भी की जाएगी। साथ ही लगातार मॉनिटरिंग करने का आदेश दिया गया है।
पर्यावरण मंजूरी और प्रदूषण नियंत्रण सहमति अनिवार्य
बालू खनन शुरू करने से पहले कई अनिवार्य अनुमतियां पूरी करना आवश्यक है। खनन योजना में घाट से निकाली जाने वाली बालू की निर्धारित मात्रा और उसकी निकासी प्रक्रिया का विस्तृत ब्यौरा होता है। पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) लेना भी बेहद जरूरी है। इसके अतिरिक्त, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना और संचालन की सहमति (सीटीई-सीटीओ) प्राप्त करना भी अनिवार्य है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी आवश्यक स्वीकृतियां तय समय सीमा के भीतर पूरी कराई जाएं।
अधिकारियों को वास्तविक निगरानी का आदेश
खान एवं भूतत्व विभाग ने अपने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बालू घाटों के संचालन की प्रक्रिया केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित न रहे। बल्कि, जमीनी स्तर पर घाटों के वास्तविक संचालन की लगातार और कड़ी निगरानी की जाए। इस निरंतर मॉनिटरिंग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 16 अक्टूबर से जब बालू घाटों का खनन शुरू हो, तो अधिकतम संख्या में घाट सुचारु रूप से संचालित हो सकें, जिससे राज्य में बालू की आपूर्ति सामान्य बनी रहे और राजस्व का नुकसान न हो।






