Darbhanga News: दरभंगा के लिए गौरव का क्षण तब आया जब दरभंगा के लाल मयंक झा ने इंडोनेशिया में फाइट नाइट (MMA) प्रतियोगिता जीतकर देश का नाम रोशन किया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अपने गृह नगर लौटे मयंक का दरभंगा एयरपोर्ट से लेकर शहर के प्रमुख चौराहों तक भव्य स्वागत किया गया। राज दरभंगा ने उनकी इस उपलब्धि के सम्मान में एक नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया, जिसने मिथिला की समृद्ध खेल परंपरा को नया आयाम दिया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर दरभंगा का परचम
मयंक झा, जो रामबाग दरभंगा के निवासी अमरकांत झा और वंदना झा के पुत्र हैं, ने इंडोनेशिया के बाली में आयोजित 135वें संस्करण वर्ग की अंतरराष्ट्रीय फाइट नाइट (MMA) प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। उनकी इस सफलता ने न केवल दरभंगा और बिहार बल्कि पूरे देश को अंतरराष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित किया है। उनके आगमन पर वरिष्ठ समाजसेवी इंजीनियर बद्री पूर्वे ने दरभंगा एयरपोर्ट पर, मनोज साह ने बेला दुर्गा मंदिर पर और वार्ड पार्षद व जिला अध्यक्ष युवा मोर्चा भाजपा दरभंगा मुकेश महासेठ ने कटहलबाड़ी भंडार चौक पर जोरदार स्वागत किया। माधवेश्वर परिसर, कामेश्वरनगर में भाजपा नेत्री आकांक्षा रानी समेत कई गणमान्य लोगों ने भी उनका अभिनंदन किया।
राज दरभंगा की खेल परंपरा का नया अध्याय
मयंक झा की इस गौरवशाली उपलब्धि के सम्मान में राज दरभंगा द्वारा कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक दरबार हॉल स्थित लक्ष्मेश्वर सभागार में एक भव्य नागरिक अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रो. लक्ष्मी निवास पांडे रहे। विशिष्ट अतिथियों में मारवाड़ी कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. हेमपति झा, दरभंगा जिला खेल सह कला-संस्कृति पदाधिकारी श्री चंदन कुमार, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अशोक प्रसाद और क्रीड़ा भारती उत्तर बिहार तथा बिहार योग संघ के प्रांत उपाध्यक्ष रविन्द्र कुमार सिंह शामिल थे। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य डॉ. संतोष कुमार ने कार्यक्रम का सफल मंच संचालन किया।
राज दरभंगा के मुख्य प्रबंधक आशुतोष दत्त ने कहा, “मयंक झा जैसे युवा फाइटर को सम्मानित कर मिथिला के युवाओं को वैश्विक मंच पर जाने के लिए प्रेरित किया गया है।”
दरभंगा और खेल का 100 साल पुराना रिश्ता
दरभंगा और खेल का रिश्ता लगभग 100 वर्ष पुराना है। राज दरभंगा ने हमेशा विभिन्न खेल गतिविधियों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया है। वर्ष 1935 में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (All India Football Federation) की नींव दरभंगा में ही पड़ी थी और तत्कालीन महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह बहादुर इसके संरक्षक बने थे। महाराजा ने कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय दरभंगा कप टूर्नामेंट भी शुरू किया था, जिसमें लाहौर, पेशावर, मद्रास, दिल्ली, जयपुर, जम्मू कश्मीर, मुंबई के अलावा अफगानिस्तान और इंग्लैंड की टीमें भाग लेती थीं। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह ने इनडोर और आउटडोर सहित चार स्टेडियमों का निर्माण भी करवाया था। स्वतंत्रता-पूर्व समय में लहेरियासराय का पोलो ग्राउंड बिहार में पोलो का एक प्रमुख केंद्र था।
महाराजाधिराज डॉ कामेश्वर सिंह के बाद राज दरभंगा एवं कामेश्वर धर्मिक ट्रस्ट के ट्रस्टी कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह भी इस खेल परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयासों से कई दशकों से खेल के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित हुए हैं।
इस अवसर पर राज दरभंगा के मुख्य प्रबंधक आशुतोष दत्त, निखिल खेरिया, राजीव प्रकाश मधुकर, प्रियांशु झा, संतोष सिंह, बबलू त्रिगुणायत, आयुष वैभव, दीपक पासवान, राजू मंडल, सुनील राय, अशोक मंडल, मुकेश झा, रामकृष्ण लाल दास, जितेंद्र ठाकुर, मुरली शंकर प्रभाकर, नियांक झा और सागर झा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। यह सम्मान समारोह मिथिला के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।







