Bihar PhD Admission: बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी दाखिले (Bihar PhD Admission) और शोध कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्यपाल सचिवालय ने बड़ा कदम उठाया है। अब पीएचडी से जुड़ी पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, जिसके लिए जल्द ही एक विशेष सेल का गठन होगा। यह फैसला उन शिकायतों के बाद आया है, जिनमें कई विश्वविद्यालयों में दाखिले को लेकर गड़बड़ी की बात सामने आई थी।
राज्यपाल सचिवालय ने सभी कुलपतियों से इस सेल के गठन और नए नियमों को लेकर सुझाव मांगे हैं। इन सुझावों के आधार पर आगे के नियम तय किए जाएंगे। 2 अक्टूबर 2026 को भी सभी विश्वविद्यालयों को पीएचडी में दाखिले से जुड़े निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
पीएचडी दाखिले में क्यों हुई सख्ती?
पीएचडी में दाखिले को लेकर कई विश्वविद्यालयों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। इसी के मद्देनजर दाखिले की पूरी प्रक्रिया को तय नियमों के हिसाब से चलाने की तैयारी है। राज्यपाल और कुलाधिपति सैयद अता हसनैन की ओर से पीएचडी के लिए नए नियम तय किए जाने के बाद यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
अब सभी विश्वविद्यालयों को पीएचडी के नए नियमों के मुताबिक ही छात्रों का दाखिला लेना होगा। इससे पहले बिहार लोक भवन ने जुलाई 2026 में पीएचडी की डिग्री देने के लिए एक जैसे नियम भी जारी किए थे, जिसका उद्देश्य पूरे राज्य में एकरूपता लाना था।
इन 14 विश्वविद्यालयों में बनेगा निगरानी सेल
राज्यपाल सचिवालय ने जिन 14 विश्वविद्यालयों में यह निगरानी सेल बनाने की तैयारी की है, उनकी सूची इस प्रकार है। यह सेल इन सभी संस्थानों में पीएचडी प्रवेश और शोध कार्यों पर नजर रखेगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
| क्र.सं. | विश्वविद्यालय का नाम |
|---|---|
| 1 | मगध विश्वविद्यालय |
| 2 | पटना विश्वविद्यालय |
| 3 | पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय |
| 4 | मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय |
| 5 | वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय |
| 6 | जय प्रकाश विश्वविद्यालय |
| 7 | आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय |
| 8 | बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय |
| 9 | ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय |
| 10 | कामेश्वर सिंह संस्कृत दरभंगा विश्वविद्यालय |
| 11 | पूर्णिया विश्वविद्यालय |
| 12 | मुंगेर विश्वविद्यालय |
| 13 | बीएन मंडल विश्वविद्यालय |
| 14 | तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय |
इन विश्वविद्यालयों में सेल के गठन से पीएचडी दाखिले की प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ेगी और छात्रों को निष्पक्ष मौका मिल पाएगा।
NET पास छात्रों के लिए क्या बदले नियम?
पीएचडी में दाखिले के लिए NET पास करने वाले छात्रों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत, जिस साल कोई छात्र NET पास करेगा, उसे उसी साल के पीएचडी दाखिले के लिए योग्य माना जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी छात्र ने 2026 में NET पास किया है, तो वह 2026 के पीएचडी दाखिले के लिए पात्र होगा।
सिर्फ NET पास करना ही पर्याप्त नहीं होगा, NET में प्राप्त योग्यता और उसके आधार पर मिलने वाले नंबरों का हिसाब भी पीएचडी के नियमों के मुताबिक होगा। इसका मतलब है कि पीएचडी में दाखिला लेने वाले छात्रों को NET के साथ बाकी जरूरी शर्तें भी पूरी करनी होंगी, जिससे गुणवत्ता बनी रहे।
विश्वविद्यालयों को मानने होंगे नए निर्देश
राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालयों को पीएचडी दाखिले से जुड़े उन लंबित कामों को भी पूरा करने का निर्देश दिया है, जो पहले से चल रहे हैं या बीच में रुके हुए हैं। इन सभी मामलों को लागू नियमों के हिसाब से आगे बढ़ाया जाएगा। इसका लक्ष्य है कि पीएचडी दाखिले की प्रक्रिया पूरे राज्य में एक ही तरीके से संचालित हो।
अब बिहार के विश्वविद्यालय अपनी सुविधा के अनुसार पीएचडी दाखिले की प्रक्रिया नहीं चला सकेंगे। सभी को तय किए गए नए नियमों के अनुसार ही छात्रों का दाखिला लेना होगा। बिहार लोक भवन की वेबसाइट पर 4 जुलाई 2026 को पीएचडी की डिग्री के लिए एक जैसे नियम जारी किए गए थे, जिसके बाद 2 अक्टूबर 2026 को दाखिले से जुड़े निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश जारी किया गया है। इन सख्त कदमों से पीएचडी शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार की उम्मीद है।







