Bihar Nepal Border: बिहार से लगी भारत-नेपाल सीमा के इलाकों में बदलती आबादी के स्वरूप को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने इन क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव की समीक्षा और सर्वे की तैयारी शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया में बिहार के सीमावर्ती जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां सुरक्षा एजेंसियां आबादी के बदलते पैटर्न पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अनुसार, सीमा के आसपास आबादी में हो रहे बदलाव से जुड़े पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। साथ ही, ‘नो मेंस लैंड’ में लगे सीमा पिलरों की खराब स्थिति भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। कई स्थानों पर सीमा पिलर या तो क्षतिग्रस्त पाए गए हैं या पूरी तरह गायब हो चुके हैं, जिससे सीमा रेखा की पहचान करने, गश्त करने और अवैध अतिक्रमण को रोकने में काफी परेशानी हो रही है।
बदलती जनसांख्यिकी पर गृह मंत्रालय की योजना
एसएसबी के आईजी नीशित कुमार उज्ज्वल ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा के आसपास बदलती जनसांख्यिकी की समीक्षा और सर्वे कराने की योजना पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि, इस सर्वे की विस्तृत समय-सारणी, इसे पूरा करने की कार्यप्रणाली और निर्धारित मानकों का पूरा विवरण अभी तक सामने नहीं आया है।
सीमा सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्र सरकार की सक्रियता इसी साल 25 फरवरी को भी दिखी थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने सीमांचल दौरे के दौरान बिहार के सीमावर्ती इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव के विषय पर अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। इस बैठक में एसएसबी, बीएसएफ, संबंधित जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। इसमें सीमावर्ती क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति और सुरक्षा से जुड़ी भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा हुई थी।
गायब और क्षतिग्रस्त सीमा पिलर भी बड़ी चुनौती
भारत-नेपाल सीमा के कई हिस्सों में सीमा पिलरों की स्थिति भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ‘नो मेंस लैंड’ में लगे सैकड़ों सीमा पिलर या तो क्षतिग्रस्त हो चुके हैं या पूरी तरह गायब हैं। ये पिलर सीमा की सटीक पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके न होने या खराब होने से सीमा रेखा का निर्धारण प्रभावित होता है, जिससे घुसपैठ और अन्य अवैध गतिविधियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर निगरानी, नियमित गश्त और अतिक्रमण रोकने के लिए सुरक्षा बलों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
बिहार, नेपाल और उत्तर प्रदेश से जुड़े सीमाई क्षेत्रों में एसएसबी की 35 से अधिक बटालियन तैनात हैं, जो सीमा प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती हैं। प्रस्तावित सर्वे और समीक्षा पूरी होने के बाद, संवेदनशील स्थानों की पहचान के आधार पर अतिरिक्त बटालियन तैनात करने और नए बॉर्डर आउटपोस्ट स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। ऐसे प्रस्तावों को गृह मंत्रालय के सामने भेजने की योजना है। कोसी क्षेत्र का सुपौल जिला और सीमांचल के अररिया तथा किशनगंज जिले भारत-नेपाल सीमा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति, स्थानीय आवागमन और सीमा चिह्नों की उपलब्धता निगरानी व्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। इस सर्वे में किन जिलों और गांवों को शामिल किया जाएगा, यह स्पष्ट होने के बाद ही इसके वास्तविक दायरे की पूरी जानकारी मिल सकेगी।







