Jale Durga Visarjan: दरभंगा के जाले में ऐतिहासिक मां जालेश्वरी दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन में अप्रत्याशित देरी हो रही है। बुधवार दोपहर 3:30 बजे मंदिर परिसर से शुरू हुई विसर्जन यात्रा गुरुवार शाम 6 बजे तक मात्र आधा किलोमीटर ही आगे बढ़ पाई थी। इस धीमी रफ्तार से स्थानीय प्रशासन भी चिंतित है, क्योंकि शुक्रवार को विधान परिषद चुनाव के मतदान के कारण पुलिस बल की कमी है।
जानकारी के अनुसार, लगभग 27 घंटे बीत जाने के बाद भी मां जालेश्वरी की प्रतिमा अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सकी है। इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हैं। प्रतिमा के आगे युवतियों की छह झिझिया नृत्य टोलियां अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं, जबकि प्रतिमा वाहन के पीछे बज रहे संगीत पर युवा थिरकते हुए आगे बढ़ रहे हैं। नृत्य-संगीत और मार्ग में भक्तों की भारी भीड़ के कारण विसर्जन यात्रा की गति बेहद धीमी बनी हुई है।
पुलिस ने की जल्द विसर्जन की अपील, बताई वजह
थानाध्यक्ष संदीप कुमार पॉल ने बताया कि शुक्रवार, 23 अक्टूबर को विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान होना है। इस वजह से सुरक्षा बलों और पुलिस पदाधिकारियों की भारी कमी है। उन्होंने पूजा समिति के अध्यक्ष और सचिव से अनुरोध किया है कि वे प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कराएं। हालांकि, गुरुवार शाम छह बजे तक भी विसर्जन यात्रा की गति में कोई खास तेजी नहीं आ पाई थी, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
श्रद्धालुओं के लिए लगाए गए सेवा शिविर
विसर्जन मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में शर्बत, पानी, मिठाई और लंगर की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, खाद्य सामग्री के ठेले और अन्य सामानों की अस्थायी दुकानें भी विसर्जन यात्रा के साथ-साथ चल रही हैं, जो भक्तों को सुविधा प्रदान कर रही हैं। इन व्यवस्थाओं से भी यात्रा की गति प्रभावित हो रही है, क्योंकि लोग जगह-जगह रुककर इनका लाभ ले रहे हैं।
अन्य जगहों पर देर रात तक संपन्न हुआ विसर्जन
जाले प्रखंड क्षेत्र में शारदीय नवरात्र की अन्य दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन 21 अक्टूबर की देर रात तक संपन्न हो गया था। बुधवार को जाले में एक दर्जन से अधिक पूजा स्थलों से दुर्गा प्रतिमा विसर्जन यात्राएं निकाली गईं। इनमें जालेश्वरी स्थान, राढ़ी ब्राह्मण टोला, राढ़ी बाजार, रेवढ़ा, जोगियारा, सहसपुर, घोघराहा, धमाद, मुरैठा, मुरैठा लगनमा धाम, मस्सा-मिर्जापुर, धनकौल, ब्रह्मपुर हाट, कदम चौक ब्रह्मपुर पश्चिमी, रतनपुर और चकौती शामिल हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए इन सभी स्थानों पर पुलिस पदाधिकारी और जवान तैनात किए गए थे।
थानाध्यक्ष संदीप कुमार पॉल ने कहा, ‘शुक्रवार को विधान परिषद चुनाव के मतदान के कारण सुरक्षा बलों और पुलिस पदाधिकारियों की कमी है। हमने पूजा समिति से प्रतिमा विसर्जन प्रक्रिया जल्द पूरी कराने की अपील की है।’
मस्सा-मिर्जापुर में प्रतिमा को पूजा-स्थल से सटे तालाब में सादगीपूर्ण माहौल में विसर्जित किया गया। वहीं, रतनपुर स्थित रत्नेश्वरी स्थान से निकली यात्रा में प्रतिमाएं शामिल नहीं थीं, क्योंकि वहां माता की पिंडी की पूजा होती है। चकौती में परंपरा के अनुसार, सभी प्रतिमाओं को सिर पर उठाकर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर चक्रेश्वरी स्थान ले जाया गया, जहां हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में उनका विसर्जन सादगीपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। राढ़ी ब्राह्मण टोला और राढ़ी बाजार में विसर्जन से पहले प्रतिमाओं ने गांव की परिक्रमा की, जिनका विसर्जन देर रात तक होने की उम्मीद थी।
अब देखना होगा कि मां जालेश्वरी की यह धीमी विसर्जन यात्रा कब तक अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच पाती है, विशेषकर पुलिस बल की कमी और चुनावी व्यस्तता के बीच।








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