जदयू में भूचाल! अनंत सिंह ने पार्टी को दिया खुला चैलेंज, ‘नए शक्ति केंद्रों’ को सीधी चुनौती |अब क्या करेंगे नीतीश? क्या होगा एक्शन?
Bihar MLC Election: पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के नतीजों से जदयू के आंतरिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है। अनंत सिंह के बागी तेवर ने पार्टी के सामने अनुशासन और सियासी संतुलन साधने की चुनौती खड़ी कर दी है, जिसका असर कई नेताओं के भविष्य पर पड़ेगा।
Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर मतदान संपन्न होने के बाद अब 27 अक्टूबर को नतीजे आने हैं। इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की रही। यहां जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार मैदान में हैं, लेकिन उन्हीं की पार्टी के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का खुलकर समर्थन कर जदयू की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मनाही के बावजूद अनंत सिंह ने डॉ. अनुज के पक्ष में प्रचार किया, जिससे पटना स्नातक सीट का परिणाम बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम हो गया है।
JDU MLC उम्मीदवार नीरज कुमार ने इशारों-इशारों में बड़ा हमला अनंत सिंह पर बोला
जो मेरे खिलाफ पार्टी के ही लोग प्रचार प्रसार कर रहे थे, राजनीति में उन लोगों का तबीयत खराब रहेगा इतना मैं आस्वस्थ कर रहा हूं।
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कब खराब होगा हम नहीं जानते हैं, लेकिन इन लोगों का तबीयत पार्टी खराब कर देगी एकदम 100% खराब रहेगा।
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जदयू में भूचाल! अनंत सिंह ने पार्टी के खिलाफ जाकर किया प्रचार, 27 अक्टूबर को क्या होगा?
Bihar MLC Election:बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर शुक्रवार को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। इन महत्वपूर्ण सीटों के नतीजे 27 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। पूरे चुनाव के दौरान सबसे अधिक चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की रही है, जहां जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार चुनाव मैदान में हैं। लेकिन, इस सीट पर जदयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का खुलकर समर्थन किया है।
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पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मनाही के बावजूद अनंत सिंह ने डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार भी किया। यही वजह है कि पटना स्नातक सीट के परिणाम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस चुनाव में जीत-हार का असर केवल नीरज कुमार और अनंत सिंह के सियासी समीकरणों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बाद, इन नतीजों से भाजपा के पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक के रुझान को लेकर भी अहम संकेत मिलने की संभावना है।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम कुछ भी हो, अनंत सिंह पर पार्टी की संभावित कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हैं। अनंत सिंह ने खुद भी कार्रवाई की आशंका के बीच बेबाकी से कहा है, ‘न मरने का गम, न जीने की खुशी।’ राजनीतिक विश्लेषक उनके इस बयान को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम के बाद जदयू के सामने अनुशासन और राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती होगी।
यदि नीरज कुमार चुनाव हारते हैं और डॉ. अनुज सिंह की जीत में अनंत सिंह की भूमिका अहम मानी जाती है, तो पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। वहीं, नीरज कुमार की जीत की स्थिति में भी अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बना रह सकता है, क्योंकि उन्होंने खुले तौर पर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने भी दो बार हस्तक्षेप किया था। इसके बावजूद अनंत सिंह अपने रुख पर कायम रहे और डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार करते रहे। अब चुनाव परिणाम के बाद पार्टी इस पूरे घटनाक्रम से कैसे निपटती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
‘न मरने का गम, न जीने की खुशी।’ – अनंत सिंह
जदयू के नए पावर सेंटर को सीधी चुनौती
अनंत सिंह के इस रुख को जदयू के भीतर उभरते नए शक्ति केंद्रों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उन्होंने इस चुनाव में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और निशांत कुमार की बात नहीं मानी। हालांकि, अनंत सिंह ने दोनों नेताओं का नाम लेकर सीधे तौर पर कोई हमला नहीं किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि ‘वे लोग पार्टी के मालिक हैं और कहीं भी जा सकते हैं।’ उनके इस बयान को पार्टी के भीतर जारी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में पटना स्नातक सीट का चुनाव अब केवल नीरज कुमार और डॉ. अनुज सिंह के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं रह गया है। इसके नतीजे जदयू के आंतरिक समीकरणों, पार्टी अनुशासन और अनंत सिंह के साथ नेतृत्व के रिश्तों को लेकर भी अहम माने जा रहे हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से किसी कार्रवाई पर अंतिम फैसला चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा।
बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए भी काफी अहम माने जा रहे हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में सवर्ण मतदाताओं के रुख को लेकर उठे सवालों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक माने जाने वाले इस वर्ग का भरोसा कायम रख पायी है या नाराजगी अब भी बरकरार है। इस चुनाव में जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। ऐसे में उसके प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। जन सुराज को मिलने वाला समर्थन भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक को कितना प्रभावित करता है, यह चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। खासकर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम इस लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। यदि जन सुराज अपने प्रदर्शन से बीजेपी, कांग्रेस और आरजेडी के वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल रहता है, तो इसका असर केवल भाजपा तक सीमित नहीं रहेगा। राजद और कांग्रेस समेत अन्य दलों के लिए भी यह अपने सामाजिक समीकरणों और मतदाता आधार की समीक्षा करने का संकेत हो सकता है।
चुनाव संपन्न हुआ हमारे कार्यकर्ताओं की जीत हुई।सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि नीतीश कुमार का संस्कार और जलवा उनके प्रति स्नेह तो रिकॉर्ड कायम कर दिया
राजनीति का जो अपराधीकरण लंपटीकरण राजनीतिक विमर्श में अपराधियों की पहचान बन जाना यह राजनीति का दुर्भाग्य जनक पक्ष था, उसके खिलाफ आपार समर्थन मिला है इसका गहरा असर आने वाला राजनीति पर पड़ेगा।
इस चुनाव में जीत या हार का असर केवल जदयू के दो प्रमुख नेताओं के सियासी समीकरणों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बाद, इन नतीजों से भाजपा के पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक के रुझान को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत मिलने की संभावना है।
जदयू की अंदरूनी जंग: अनंत सिंह पर क्या होगा एक्शन?
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम कुछ भी हो, अनंत सिंह पर पार्टी की कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हैं। खुद अनंत सिंह कार्रवाई की आशंका के बीच कह चुके हैं,
‘न मरने का गम, न जीने की खुशी।’
उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव परिणाम के बाद जदयू के सामने पार्टी अनुशासन और राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती होगी। यदि नीरज कुमार चुनाव हारते हैं और डॉ. अनुज सिंह की जीत में अनंत सिंह की भूमिका अहम मानी जाती है, तो पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग और तेज हो सकती है। वहीं, नीरज कुमार की जीत की स्थिति में भी अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बना रह सकता है, क्योंकि उन्होंने खुले तौर पर पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर एक अलग रुख अपनाया है।
इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने भी दो बार हस्तक्षेप करने का प्रयास किया था। इसके बावजूद अनंत सिंह अपने रुख पर कायम रहे और डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार करते रहे। अब चुनाव परिणाम के बाद पार्टी इस पूरे घटनाक्रम से कैसे निपटती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
जदयू के ‘नए शक्ति केंद्रों’ को सीधी चुनौती
अनंत सिंह के इस रुख को जदयू के भीतर उभरते नए शक्ति केंद्रों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उन्होंने इस चुनाव में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और निशांत कुमार की बात नहीं मानी। हालांकि, अनंत सिंह ने दोनों नेताओं का नाम लेकर सीधे तौर पर कोई हमला नहीं किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि
‘वे लोग पार्टी के मालिक हैं और कहीं भी जा सकते हैं।’
उनके इस बयान को पार्टी के भीतर जारी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।
ऐसे में पटना स्नातक सीट का चुनाव अब केवल नीरज कुमार और डॉ. अनुज सिंह के बीच के मुकाबले तक सीमित नहीं रह गया है। इसके नतीजे जदयू के आंतरिक समीकरणों, पार्टी अनुशासन और अनंत सिंह के साथ नेतृत्व के रिश्तों को लेकर भी बेहद अहम माने जा रहे हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से किसी कार्रवाई पर अंतिम फैसला चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा।
सवर्ण वोट बैंक का बदलेगा रुख? भाजपा-जन सुराज पर असर
बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में सवर्ण मतदाताओं के रुख को लेकर उठे सवालों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक माने जाने वाले इस वर्ग का भरोसा कायम रख पाई है या नाराजगी अब भी बरकरार है। इस चुनाव में जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। ऐसे में उसके प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी।
जन सुराज को मिलने वाला समर्थन भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक को कितना प्रभावित करता है, यह चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। खासकर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम इस लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। यदि जन सुराज अपने प्रदर्शन से बीजेपी, कांग्रेस और आरजेडी के वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल रहता है, तो इसका असर केवल भाजपा तक सीमित नहीं रहेगा। राजद और कांग्रेस समेत अन्य दलों के लिए भी यह अपने सामाजिक समीकरणों और मतदाता आधार की समीक्षा करने का एक बड़ा संकेत हो सकता है।
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