Bihar Assistant Professor: बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे हजारों शोधार्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में करीब बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों में 9560 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर जल्द विज्ञापन जारी करने की मांग उठाई गई है। नेट-जेआरएफ क्वालिफाइड एसोसिएशन ऑफ बिहार ने चयन प्रक्रिया में एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर (API) प्रणाली को समाप्त कर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर आधारित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से नियुक्ति करने पर जोर दिया है।
एसोसिएशन का कहना है कि आगामी भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, जिससे सभी योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सकें। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गुरुवार को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के टिल्हा कोठी में एक बैठक आयोजित की गई, जहां भर्ती प्रक्रिया के साथ-साथ शोधार्थियों और उच्च शिक्षा से जुड़े अन्य अहम विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
9560 पदों पर शीघ्र भर्ती विज्ञापन की मांग
नेट-जेआरएफ क्वालिफाइड एसोसिएशन ऑफ बिहार की प्रमुख मांगों में राज्य में करीब 9560 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए तत्काल विज्ञापन जारी करना शामिल है। एसोसिएशन से जुड़े शोधार्थियों का तर्क है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्तियों की प्रक्रिया समय पर आगे बढ़नी चाहिए, ताकि योग्य उम्मीदवारों को अपना करियर बनाने का अवसर मिल सके।
असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति विश्वविद्यालयों में शिक्षण और शोध व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होने से नियुक्ति की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना रहता है। इसके साथ ही, विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी से शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। हालांकि, इन 9560 पदों पर भर्ती का विज्ञापन कब जारी होगा, इसकी कोई आधिकारिक तारीख अभी उपलब्ध नहीं है। यह मांग वर्तमान में एसोसिएशन द्वारा उठाई गई है, और वास्तविक समयसीमा व पदों की अंतिम संख्या संबंधित सरकारी विभाग या नियुक्ति प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
API प्रणाली खत्म कर प्रतियोगी परीक्षा से हो चयन
एसोसिएशन ने चयन प्रक्रिया में एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर (API) प्रणाली को समाप्त करने की पुरजोर मांग की है। शोधार्थियों का कहना है कि पूर्व में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्तियों में API आधारित प्रक्रिया अपनाई गई थी, जिस पर विभिन्न स्तरों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
नेट-जेआरएफ क्वालिफाइड एसोसिएशन ऑफ बिहार का कहना है कि असिस्टेंट प्रोफेसर की आगामी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि सभी योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।
संगठन चाहता है कि आगामी नियुक्तियों में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर आधारित प्रतियोगी परीक्षा आयोजित की जाए। एसोसिएशन का मानना है कि इस तरह की परीक्षा से चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है, जिससे सभी अभ्यर्थियों को समान और न्यायसंगत अवसर प्राप्त होंगे। यह मांग ऐसे समय में उठाई जा रही है, जब उच्च शिक्षा में करियर बनाने वाले अभ्यर्थियों के लिए पात्रता परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया भी बेहद अहम होती है। हालांकि, API प्रणाली के स्थान पर प्रतियोगी परीक्षा लागू करने का अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित प्राधिकारियों के हाथ में है।
नौ-सूत्रीय मांगपत्र में शोधार्थियों के अन्य मुद्दे भी शामिल
एसोसिएशन ने केवल असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती तक अपनी मांगों को सीमित नहीं रखा है, बल्कि शोधार्थियों और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर एक व्यापक नौ-सूत्रीय मांगपत्र भी तैयार किया है। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में API प्रणाली समाप्त करने और 9560 पदों पर शीघ्र विज्ञापन जारी करने के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी शामिल हैं:
- आयु सीमा को बढ़ाकर 55 वर्ष करना।
- शिक्षकों की भर्ती में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।
- नॉन-नेट फेलोशिप की सुविधा प्रदान करना।
- शोधार्थियों के लिए छात्रावास और एचआरए (मकान किराया भत्ता) की सुविधा उपलब्ध कराना।
- स्टेट आइडी कार्ड जारी करना।
- सरल स्थानांतरण प्रक्रिया लागू करना।
- उन्नत प्रयोगशालाओं के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) करना।
इन मांगों का सीधा संबंध उच्च शिक्षा में अवसर, शोध के लिए आवश्यक संसाधन और विश्वविद्यालयों में कामकाज की बेहतर व्यवस्था से है। शोधार्थियों के लिए फेलोशिप, छात्रावास और एचआरए जैसी सुविधाएं उनके शोध कार्य को जारी रखने में महत्वपूर्ण सहायक हो सकती हैं, जबकि बेहतर प्रयोगशालाएं और संस्थानों के बीच सहयोग शोध की गुणवत्ता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन मांगों को लागू करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन, नियम और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
टीएमबीयू से शुरू होगा शोधार्थियों को एकजुट करने का अभियान
बैठक में अंग्रेजी विषय के शोधार्थी मिथिलेश आनंद ने बताया कि नेट-जेआरएफ क्वालिफाइड एसोसिएशन ऑफ बिहार अपनी नौ-सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों को एकजुट करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस अभियान की शुरुआत तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से की जाएगी, जिसके तहत शोधार्थियों की एक व्यापक सभा आयोजित करने की योजना है। इस सभा की तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी। मिथिलेश आनंद के अनुसार, संगठन का उद्देश्य राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों को एक मंच पर लाकर उनकी समस्याओं और मांगों को सरकार तथा उच्च शिक्षा विभाग के सामने मजबूती से रखना है। गुरुवार को आयोजित बैठक में मनोहर कुमार, अबरार, सचिन, नीतू, दिव्या, चैतन्य, संतोष, सुधीर और सौरभ समेत कई अन्य लोग मौजूद थे।
सरकारी निर्णय और भर्ती विज्ञापन पर टिकी नजरें
एसोसिएशन की इन मांगों के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भर्ती विज्ञापन जारी करने, चयन प्रक्रिया में बदलाव और शोधार्थियों की सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं। संगठन ने अपनी मांगें सामने रखी हैं और टीएमबीयू से अभियान शुरू करने की तैयारी की है। भर्ती प्रक्रिया में बदलाव, पदों की अंतिम संख्या और विज्ञापन की समयसीमा के संबंध में किसी भी आधिकारिक घोषणा की जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं है। असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अगला महत्वपूर्ण पड़ाव भर्ती से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना होगी, जिसमें पदों की संख्या, पात्रता, चयन प्रक्रिया, आयु सीमा और आवेदन की समयसीमा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट होंगी। तब तक 9560 पदों पर भर्ती और API प्रणाली समाप्त करने की मांग को एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

















