Bihar Education Department: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में बिहार शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विभाग अब अपने लिपिकों और कर्मचारियों के लिए नए कैडर के निर्माण और स्थानांतरण नियमों में बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। यह कदम लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित कर्मियों के तबादले की तैयारी के तहत उठाया जा रहा है, जिससे लगभग 10 हजार कर्मचारियों पर सीधा असर पड़ेगा।
विभाग की योजना है कि जिला या प्रमंडल स्तर तक सीमित कर्मचारियों के मौजूदा कैडर को राज्यस्तरीय बनाया जाए। इससे आवश्यकतानुसार कर्मचारियों को राज्य के किसी भी जिले में पदस्थापित किया जा सकेगा। यह बदलाव उन करीब 10 हजार कर्मचारियों के लिए खास मायने रखता है, जो 10 साल या उससे अधिक समय से एक ही जगह पर कार्यरत हैं।

क्यों जरूरी हुआ यह बड़ा बदलाव?
शिक्षा विभाग को मिली जानकारी के अनुसार, विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में कर्मचारी 10 साल या उससे अधिक समय से एक ही कार्यालय में काम कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए, विभाग ने सभी जिलों से कर्मचारियों की पदस्थापना से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें वर्तमान कार्यालय में योगदान की तारीख और वहां कार्यरत रहने की अवधि का पूरा ब्योरा शामिल है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रस्तावित प्रावधानों पर विभागीय स्तर पर लगातार विचार-विमर्श चल रहा है। कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए एक निश्चित अवधि तय करने पर भी गहन मंथन जारी है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए तीन साल की अवधि निर्धारित करने का प्रस्ताव है, यानी जिला स्तर पर अधिकतम तीन साल तक ही पदस्थापन की सीमा तय की जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय नियमावली में संशोधन के बाद ही स्पष्ट होगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाना है।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?
वर्तमान में, बिहार शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यालयों के कर्मचारियों का कैडर जिला या प्रमंडल स्तर तक ही सीमित है। इसका मतलब है कि उनका तबादला केवल निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के भीतर ही हो पाता है। प्रस्तावित बदलाव के तहत, कैडर का दायरा बढ़ाकर राज्यस्तरीय कर दिया जाएगा। इससे कर्मचारियों को एक जिले से दूसरे जिले में भी तैनात किया जा सकेगा, जो पहले संभव नहीं था।
नई व्यवस्था के लागू होने पर, कार्यालयों में काम के बोझ और स्वीकृत पदों के अनुपात में कर्मचारियों की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा। उदाहरण के लिए, पटना, गया और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों में यदि आवश्यकता से अधिक कर्मचारी पाए जाते हैं, तो उन्हें उन कार्यालयों में भेजा जा सकेगा जहां कर्मियों की कमी है। नियमावली में संशोधन और सक्षम स्तर से मंजूरी मिलने के बाद ही इस प्रक्रिया को लागू किया जाएगा।

















