Bihar BJP की राजनीतिक हलचल के बीच Bihar में दो निर्दलीय विधान पार्षदों राहुल और वंशीधर के पार्टी कार्यालय पहुंचने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल यानी RJD के नेता मनोज झा द्वारा इन दोनों नेताओं की सदस्यता पर सवाल उठाए जाने और उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है। विपक्ष के इन तीखे हमलों पर अब पार्टी की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी गई है.
समर्थन और सदस्यता में अंतर पर सफाई
पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सरावगी ने सामने आकर इस पूरे घटनाक्रम पर विराम लगाने की कोशिश की है। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षद केवल भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के प्रति अपनी आस्था जताने के लिए कार्यालय आए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के विकास कार्यों पर भरोसा जताते हुए उन्होंने गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान किया है.
राहुल और वंशीधर पार्टी कार्यालय पहुंचे थे और उन्होंने एनडीए को अपना समर्थन दिया है, लेकिन वे औपचारिक सदस्यता लेने नहीं आए थे।
पार्टी कार्यालय में हुआ था स्वागत
दोनों निर्दलीय पार्षदों के बीजेपी कार्यालय पहुंचने पर उनका पारंपरिक तरीके से अभिनंदन किया गया था। इस दौरान उन्हें पार्टी का पट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में उनके औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। इसी गफलत का फायदा उठाते हुए विपक्षी दलों ने सरकार और बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया था.
विपक्षी दलों की आपत्तियों पर जवाब
आरजेडी सांसद मनोज झा ने इस मामले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की मांग तक कर डाली थी। विपक्षी खेमे का तर्क था कि यदि वे निर्दलीय चुनकर आए हैं, तो इस तरह का कदम नियमों के खिलाफ है। इन तमाम विरोध प्रदर्शनों और सवालों के बीच संजय सरावगी ने दो टूक कहा कि स्वागत और अभिनंदन का मतलब औपचारिक रूप से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करना नहीं होता है.
आने वाले दिनों में इस राजनीतिक घटनाक्रम पर राज्य की अन्य पार्टियों की क्या प्रतिक्रिया रहती है और विधानसभा के भीतर इसके क्या राजनीतिक मायने निकलते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.







