Army impersonator की धोखाधड़ी का एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां खुद को सेना का अधिकारी बताकर जेल में बंद कैदियों को रिहा कराने का झांसा देने वाले एक व्यक्ति को पुलिस ने धर दबोचा। आरोपी ने हत्या के मामले में जेल में सजा काट रहे बंदियों के परिजनों को अपना शिकार बनाने की साजिश रची थी, लेकिन सतर्कता के चलते उसकी चाल कामयाब नहीं हो सकी।
जेल से भाई को बाहर निकालने के नाम पर मांगी गई थी मोटी रकम
पीलीभीत जिले के सुनगढ़ी क्षेत्र के गायबोझ गांव निवासी चंदनलाल के भाई योगेश और रिश्तेदार धीरेंद्र एक हत्या के मामले में पीलीभीत जेल में बंद हैं। चंदनलाल की मुलाकात सदर क्षेत्र के मऊ खास निवासी रवि कुमार से हुई थी। रवि ने खुद को भारतीय सेना में कैप्टन बताते हुए पुलिस अधिकारियों से गहरी जान पहचान का दावा किया था। उसने चंदनलाल के भाइयों को जल्द जेल से बाहर निकलवाने का भरोसा दिलाते हुए इसके एवज में 50 हजार रुपये की मांग की थी। तय योजना के तहत रविवार को रुपये दिए जाने थे, लेकिन आरोपी ने अचानक मिलने का स्थान बदलकर निगोही आने को कह दिया।
बार-बार जगह बदलने पर हुआ शक, ऐसे खुला राज
बार-बार ठिकाना बदलने और बातचीत का अंदाज सैन्य अधिकारियों जैसा न लगने पर परिजनों को संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस को इस संदिग्ध गतिविधि की सूचना दी। सूचना मिलते ही Bihar जैसी अन्य आपराधिक घटनाओं की तर्ज पर सतर्क हुई निगोही पुलिस ने टिकरी चौकी के पास घेराबंदी की। प्रभारी निरीक्षक अरविंद सिंह चौहान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे तो रवि सेना के कैप्टन की वर्दी पहने एक धार्मिक स्थल के पास बाइक के साथ खड़ा मिला। जब उससे तैनाती के बारे में पूछा गया तो उसने खुद को श्रीनगर में तैनात और छुट्टी पर आया बताया। हालांकि, वह अपना पहचान पत्र नहीं दिखा सका और एनडीए की फुल फॉर्म भी नहीं बता पाया।
कैप्टन की वर्दी पहनकर घूम रहे फर्जी अधिकारी से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने सच्चाई उगल दी। आरोपी ने कबूल किया कि वह जल्दी अमीर बनने की चाहत में फर्जीवाड़ा कर रहा था।
कैंटीन के काम के अनुभव का उठाया गलत फायदा
पुलिस पूछताछ में आरोपी रवि ने खुलासा किया कि उसने शाहजहांपुर कैंट और बरेली कैंट के सेना भोजनालय में काफी समय तक काम किया था। इसी दौरान उसे सेना की कार्यप्रणाली और तौर-तरीकों की जानकारी मिल गई थी। इसी का फायदा उठाकर उसने कैप्टन रैंक की फर्जी वर्दी तैयार करवाई थी और लोगों के काम कराने के नाम पर ठगी का धंधा शुरू कर दिया था। तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके पास से नरेश नाम के एक जवान का कैंटीन स्मार्ट कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी बरामद किया है, जिसकी वैधता और असलियत की जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस ठग ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।







