Bihar MLC Election: हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधान परिषद चुनाव के बाद दो निर्दलीय एमएलसी राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के बीजेपी में शामिल होने की खबर ने राज्य की सियासत में हलचल
मचा दी है. इन दोनों नेताओं की बीजेपी में शामिल होते हुए तस्वीरें सामने आने के बाद सियासी विवाद गहरा गया है. विपक्षी दलों ने इसे संविधान और दल-बदल कानून का गंभीर उल्लंघन करार दिया है.
संविधान के 10वीं अनुसूची की धज्जियाँ उड़ाते हुए “2 निर्दलीय MLC” को खुलेआम BJP की सदस्यता दिलवा कर अब उससे पलट जाने से साक्ष्य नहीं मिटेंगे!
इस पूरे मामले पर बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पहले दिए गए अपने बयान में बदलाव किया है. उन्होंने कहा कि दोनों निर्दलीय एमएलसी ने बीजेपी को सिर्फ समर्थन दिया है, पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं की है. उनके मुताबिक, इसमें कुछ भी गलत नहीं है.
बीजेपी अध्यक्ष ने दी सफाई, कहा- सिर्फ समर्थन मिला है
निर्दलीय एमएलसी के बीजेपी से जुड़ने को लेकर बढ़ते विवाद के बीच, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मीडिया से बात करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने सिर्फ बीजेपी को समर्थन दिया है.
संजय सरावगी ने बताया, ‘कोई भी निर्दलीय विधान पार्षद या विधायक समर्थन दे सकता है. दोनों निर्दलीय विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों, नीतीश कुमार की नीतियों और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, एनडीए और बीजेपी की नीतियों पर आस्था प्रकट की है. इन लोगों ने बीजेपी का समर्थन किया है. इसमें कुछ भी गलत नहीं है.’
यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल इन एमएलसी के पार्टी में शामिल होने को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं.
जन सुराज ने सदस्यता रद्द करने की मांग की
इस मामले में जन सुराज पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया है. पार्टी ने राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की विधान परिषद सदस्यता तुरंत रद्द करने की मांग की है. जन सुराज का आरोप है कि इन दोनों नेताओं ने निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है, जो संविधान और दल-बदल कानून का सीधा उल्लंघन है
.निर्दलीय MLC बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने को दल-बदल कानून का उल्लंघन बताते हुए, संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग लेकर जन सुराज का प्रतिनिधिमंडल बिहार विधान परिषद के सभापति से मिला।
जन सुराज के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार मुन्ना और पूर्व विधान पार्षद रामबली सिंह चंद्रवंशी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विधान परिषद के सभापति राम बचन राय से मुलाकात की थी. प्रतिनिधिमंडल ने सभापति को एक याचिका सौंपी, जिसमें दोनों एमएलसी को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी.
मुलाकात के बाद रामबली चंद्रवंशी ने मीडिया से कहा कि दोनों नेताओं ने जिस तरह से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है, उसे पूरे देश ने देखा है और यह संविधान का स्पष्ट उल्लंघन है.
राजद ने भी उठाए सवाल, दोबारा चुनाव की मांग
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी और दोनों एमएलसी पर गंभीर सवाल उठाए हैं. राजद विधायक और पूर्व मंत्री आलोक कुमार मेहता ने इन दोनों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी.
आलोक मेहता ने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेना संविधान की दसवीं अनुसूची का उल्लंघन है. उन्होंने दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) का हवाला देते हुए कहा कि कोई निर्दलीय सदस्य चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसकी सदस्यता अयोग्यता के दायरे में आ सकती है. मेहता ने सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में दोबारा चुनाव कराने की भी मांग की है.
राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के बीजेपी से जुड़ने का यह मामला अब राजनीतिक विवाद के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बहस का मुद्दा बन गया है. जहां एक ओर बीजेपी इसे केवल समर्थन बताकर बचाव कर रही है, वहीं जन सुराज और राजद दोनों एमएलसी की सदस्यता रद्द करने पर अड़े हुए हैं.








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