Bihar Politics: इन दिनों बिहार की सियासत में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेज प्रताप यादव का एक बयान राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए तेज प्रताप यादव कुछ ऐसा कह गए, जिसने लालू परिवार और RJD के भीतर की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामान्य ज्ञान पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या वह ‘चरवाहा विद्यालय’ में पढ़े हैं?

सियासी जानकारों का मानना है कि यह टिप्पणी सिर्फ एक राजनीतिक कटाक्ष नहीं है, बल्कि इसके तार लालू परिवार के भीतर मची उथल-पुथल से जुड़े हैं, जिसने तेज प्रताप को हाशिए पर धकेल दिया है। इस तंज के मायने काफी गहरे हैं, क्योंकि ‘चरवाहा विद्यालय’ तेज प्रताप के पिता और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्रित्व काल का सबसे चर्चित और विवादित प्रोजेक्ट था। अपने ही पिता के सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट का इस्तेमाल एक विरोधी नेता को नीचा दिखाने के लिए करना कोई मामूली बात नहीं है।
लालू के ‘चरवाहा विद्यालय’ पर सवाल, परिवार में बगावत के सुर
तेज प्रताप यादव का यह बयान साफ दर्शाता है कि राजद और परिवार से दरकिनार किए जाने के बाद उनके भीतर गहरी नाराजगी पल रही है। हाल ही में पार्टी और परिवार के अंदर जिस तरह से तेज प्रताप यादव को अलग-थलग किया गया है, यह उसी बगावत की आग का धुआँ है। कभी खुद को कृष्ण और तेजस्वी को अर्जुन बताने वाले तेज प्रताप अब अपनी ही पारिवारिक राजनीतिक विरासत पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। सम्राट चौधरी द्वारा ‘क्राइम’ और ‘अपराध’ में फर्क न कर पाने को आधार बनाकर उन्होंने जो ‘चरवाहा’ वाला बाण छोड़ा है, वह सीधे लालू प्रसाद यादव के सियासी मॉडल पर जाकर लगा है।
तेज प्रताप यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तंज कसते हुए कहा, ‘क्या मुख्यमंत्री ‘चरवाहा विद्यालय’ में पढ़े हैं?’ इस बयान ने लालू परिवार की अंदरूनी कलह को सामने ला दिया है।
तेज प्रताप की जुबानी, लालू परिवार की कहानी
तेज प्रताप ने मुफ्त बिजली छोड़ने की अपील पर भी सरकार को घेरा और पूछा कि क्या लोग त्योहार मनाना छोड़ दें? लेकिन उनके इस पूरे बयान में सबसे ज्यादा गूँज ‘चरवाहा विद्यालय’ की ही है। राजनीति में शब्दों का चयन बहुत मायने रखता है। अपने पिता की योजना को तंज का हथियार बनाकर तेज प्रताप ने अनजाने में या जानबूझकर यह साबित कर दिया है कि लालू परिवार के रिश्तों के बीच की खाई अब बहुत चौड़ी हो चुकी है और बगावत के सुर अब छिपने वाले नहीं हैं। यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में RJD की अंदरूनी राजनीति में और हलचल पैदा कर सकता है।
आगे क्या होगा?
इस बयान के बाद लालू परिवार और RJD के भीतर की आंतरिक खींचतान और बढ़ने की संभावना है। तेज प्रताप यादव के इस खुले विद्रोह से पार्टी के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, खासकर ऐसे समय में जब आगामी चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव इस बयान को कैसे लेते हैं और इसका पार्टी की एकजुटता पर क्या असर पड़ता है।







