Bihar Foreign Nationals: बिहार के गोपालगंज में करीब तीन दशक पुराने एक बेहद संवेदनशील मामले ने फिर से सुर्खियां बटोर ली हैं. 1990 से 2015 के बीच मिशनरी यानी धार्मिक यात्रा वीजा पर पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और रूस से कुल 173 विदेशी नागरिक यहां पहुंचे थे. अब इन Bihar Foreign Nationals के आगमन और वापसी से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू हो गई है, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की भूमिका भी सामने आई है.

इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पुष्टि की है कि सरकार इसे बेहद गंभीरता से ले रही है. उनके मुताबिक, गृह विभाग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और अब एनआईए इसकी जांच कर रही है. मंत्री के इस बयान के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी पुराने रिकॉर्ड और संबंधित नागरिकों का पूरा ब्योरा खंगालने में जुट गई हैं.
पाकिस्तान से आए 167 नागरिक, उज्बेकिस्तान और रूस के भी शामिल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 1990 से 2015 के बीच पाकिस्तान के कराची और रावलपिंडी से 167 नागरिक मिशनरी वीजा पर गोपालगंज आए थे. इस सूची में उज्बेकिस्तान के पांच और रूस का एक नागरिक भी शामिल है. इन विदेशी नागरिकों के आगमन से संबंधित जानकारी आरटीआई के जवाब में तत्कालीन एसपी के पत्रांक 396, दिनांक 28 नवंबर 2015 के माध्यम से सामने आई थी, जिसमें उनके आवासीय पते का ब्योरा भी उपलब्ध कराया गया था.
अब जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि इन नागरिकों की वापसी से जुड़े रिकॉर्ड क्या हैं और वे फिलहाल कहां हैं. गोपालगंज के एसपी मनोज कुमार तिवारी ने बताया कि पाकिस्तान से आए नागरिक वापस लौटे या नहीं, इसकी जांच की जा रही है. यह जांच सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
धार्मिक यात्रा के उद्देश्य पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि विदेशी नागरिक धार्मिक यात्रा के उद्देश्य से गोपालगंज क्यों पहुंचे थे. स्थानीय स्तर पर अजमेर शरीफ, ख्वाजा गरीब नवाज या दिल्ली स्थित ख्वाजा निजामुद्दीन दरगाह जैसे कोई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय धार्मिक केंद्र यहां नहीं हैं. हालांकि, मीरगंज में माधवालाल का मजार मौजूद है. भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान गोपालगंज से पाकिस्तान गए कई परिवार कराची में बस गए थे, ऐसे में पुराने संबंधों और पूर्वजों के घर देखने के लिए लोगों के आने की बात भी सामने आती रही है. हालांकि, संबंधित नागरिकों के वास्तविक यात्रा उद्देश्य की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
शहर आधारित वीजा और विधानसभा में उठा मामला
जानकार सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान से भारत आने वाले नागरिकों को शहर आधारित वीजा जारी किया जाता है. ऐसे नागरिकों को निर्धारित शहर पहुंचने के बाद स्थानीय थाने में पासपोर्ट और वीजा की छायाप्रति के साथ ठहरने की जानकारी देनी होती है. वापसी के बाद इसकी सूचना भी संबंधित थाने को देने का प्रावधान है. इसी प्रक्रिया के तहत पुराने पुलिस रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जा रही है. केंद्रीय खुफिया एजेंसियां भी संबंधित नागरिकों का विवरण जुटा रही हैं.
नौ फरवरी को यह मामला बिहार विधानसभा में भी उठा था. उस समय उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में बताया था कि वर्ष 1995 से 2015 के बीच धार्मिक यात्रा के उद्देश्य से बिहार में कुल 173 विदेशी नागरिक आए थे. इनमें 167 पाकिस्तान से थे, जबकि शेष नागरिक ब्रिटेन, रूस और उज्बेकिस्तान से आए थे. सम्राट चौधरी ने सदन में यह भी कहा था कि सभी विदेशी नागरिक अपने-अपने देश लौट गए थे.
वहीं, अब शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के बयान और पुलिस की ओर से जारी जांच की जानकारी के बाद वापसी से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल पर चर्चा तेज हो गई है. जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, जिससे सुरक्षा से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है.







