Bihar Anant Singh: बिहार के मोकामा से विधायक बिहार अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शुक्रवार को सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ उत्तर प्रदेश पहुंचे अनंत सिंह को वाराणसी में पुलिस ने रोक दिया, जिससे सियासी गलियारों में हलचल मच गई। धनतेरस के मौके पर ट्रैफिक व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रशासन ने उन्हें महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने से मना कर दिया।

विधायक अनंत सिंह वाराणसी स्थित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) जाना चाहते थे, जहां उनका इरादा महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करना था। हालांकि, प्रशासन ने उन्हें अपने 400 गाड़ियों के विशाल काफिले के साथ शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी।
धनतेरस पर ‘छोटे सरकार’ को झटका! वाराणसी में पुलिस ने रोका अनंत सिंह का काफिला, शहर में नहीं मिली एंट्री
Anant Singh: बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर मोकामा के विधायक अनंत सिंह के काफिले को वाराणसी में शहर के भीतर प्रवेश करने से रोक दिया गया। शुक्रवार शाम करीब पांच बजे जब उनका सैकड़ों गाड़ियों वाला काफिला डाफी क्षेत्र के हरसेवानंद स्कूल के पास मलहिया मार्ग पर पहुंचा, तो वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उसे आगे बढ़ने नहीं दिया। अनंत सिंह पटना से प्रयागराज जा रहे थे और उनका बीएचयू के सिंहद्वार स्थित लंका चौराहे पर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने का कार्यक्रम था, लेकिन यह योजना धरी रह गई।
प्रशासन से अनुमति न मिलने और धनतेरस के त्योहार पर शहर में भारी भीड़ को देखते हुए यह कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। अपने समर्थकों के बीच काफी लोकप्रिय अनंत सिंह के इस काफिले में बड़ी संख्या में गाड़ियां शामिल थीं, और पटना से प्रयागराज की यात्रा के दौरान कई जगहों पर उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत भी किया था।
वाराणसी में क्यों रोका गया अनंत सिंह का काफिला?
वाराणसी पुलिस ने विधायक अनंत सिंह के काफिले को रोकने के पीछे प्रशासनिक अनुमति का अभाव और शहर की यातायात व्यवस्था को प्रमुख कारण बताया। अधिकारियों के अनुसार, इतने बड़े काफिले के साथ शहर में प्रवेश करने के लिए पहले से कोई अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए उसे भीतर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती थी। शुक्रवार को धनतेरस होने के कारण वाराणसी के बाजारों में जबरदस्त भीड़ थी और प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया था।
त्योहार के मद्देनजर पुलिस और प्रशासन यातायात को सुचारु बनाए रखने में जुटे थे। ऐसे में सैकड़ों गाड़ियों के काफिले को शहर में प्रवेश देने से ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका थी। इसी स्थिति को देखते हुए पुलिस ने डाफी क्षेत्र में काफिले को रोक दिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने अनंत सिंह को पूरी प्रशासनिक स्थिति से अवगत कराया और उन्हें शहर में प्रवेश न करने की सलाह दी।
पुलिस की समझाइश के बाद बदला गया यात्रा का रास्ता
वाराणसी में पुलिस प्रशासन के कड़े रुख के बाद अनंत सिंह ने शहर के भीतर जाने का अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। अधिकारियों की समझाइश के बाद उनका काफिला वैकल्पिक मार्ग से प्रयागराज के लिए रवाना हुआ। काफिले को वाराणसी शहर में प्रवेश कराने के बजाय बाईपास मार्ग और भदोही के रास्ते आगे भेजा गया। इस दौरान किसी तरह के टकराव की कोई सूचना नहीं मिली, क्योंकि प्रशासन के साथ बातचीत के बाद यात्रा का मार्ग बदल दिया गया था।
लंका चौराहे पर अनंत सिंह के स्वागत के लिए इंतजार कर रहे उनके समर्थक काफिले के शहर में नहीं आने की सूचना के बाद मायूस नजर आए। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण का कार्यक्रम भी अधूरा ही रह गया।
अनंत सिंह की प्रयागराज यात्रा का क्या था मकसद?
अनंत सिंह की प्रयागराज यात्रा का मुख्य उद्देश्य अपने करीबी मित्र पप्पू सलमान के घर आयोजित पारिवारिक समारोह में शामिल होना था। इसके अतिरिक्त, वह अपनी बेटी के आगामी विवाह के निमंत्रण देने के लिए भी निकले थे। पटना से प्रयागराज की इस यात्रा के दौरान उनके काफिले का बिहटा, आरा, बक्सर और चंदौली जैसे कई स्थानों पर समर्थकों ने अभिनंदन किया।
काफिले में शामिल गाड़ियों की बड़ी संख्या के कारण यह यात्रा राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि, वाराणसी में पुलिस प्रशासन ने यातायात प्रबंधन और अनुमति से जुड़े नियमों को प्राथमिकता दी, जिसके कारण अनंत सिंह के काफिले को शहर के भीतर प्रवेश नहीं मिल सका और उनकी वाराणसी यात्रा शहर में कदम रखे बिना ही समाप्त हो गई।
पुलिस ने क्यों रोका ‘छोटे सरकार’ का काफिला?
पुलिस ने अनंत सिंह को मात्र पांच गाड़ियों के साथ आगे बढ़ने की शर्त रखी, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। सूत्रों के अनुसार, ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह ने दो टूक कह दिया कि वे कम गाड़ियों के साथ नहीं चलते हैं, और यदि अनुमति नहीं मिलेगी तो वे आगे नहीं बढ़ेंगे।
“हम कम गाड़ियों के साथ नहीं चलते हैं। अगर परमिशन नहीं मिलेगी तो हम नहीं जायेंगे।”
वाराणसी में प्रवेश न मिलने के बाद अनंत सिंह शहर के बाहर से ही प्रयागराज के लिए रवाना हो गए। रास्ते भर उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। कई जगहों पर जेसीबी मशीनों से फूलों की बारिश कर उनका अभिनंदन किया गया, जिससे उनके काफिले में और भी समर्थक जुड़ते चले गए।
कौन हैं अनंत सिंह के दोस्त पप्पू सलमान?
प्रयागराज पहुंचने पर अनंत सिंह अपने पुराने दोस्त पप्पू सलमान के घर पहुंचे, जहां वे उनके बेटे की रिसेप्शन पार्टी में शामिल हुए। पप्पू सलमान, जिनका असली नाम सलमान अहमद है और जिन्हें पप्पू मलावां के नाम से भी जाना जाता है, प्रयागराज के एक जाने-माने किसान हैं।
पप्पू सलमान समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक सदस्यों में से हैं और प्रयागराज गंगापार जिले के उपाध्यक्ष भी हैं। सपा की राजनीति में उन्हें जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित का करीबी माना जाता है। हालांकि पप्पू सलमान ने खुद कभी चुनाव नहीं लड़ा है। अनंत सिंह और पप्पू सलमान की दोस्ती करीब तीन दशक पुरानी है, जो किसी राजनीतिक या चुनावी समीकरण से परे है।
बिहार अनंत सिंह का दबदबा कायम
पुलिस द्वारा रोके जाने के बावजूद अनंत सिंह का यह भव्य काफिला और समर्थकों का उत्साह दर्शाता है कि बिहार के इस बाहुबली विधायक का दबदबा आज भी कायम है। इस घटना ने एक बार फिर उनके राजनीतिक प्रभाव और जनसंपर्क की ताकत को उजागर किया है।








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