
दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। मिल्लत कॉलेज के प्रो. भक्तिनाथ झा 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होंगे। इस यादगार मौके पर समाजशास्त्र विभाग के छात्रों ने छात्र संघ से जुड़े अपने पदाधिकारियों के साथ मिलकर गुरुवार को सेमिनार का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. मो. रहमतुल्लाह ने किया। मौके पर छात्र-छात्राओं ने पेपर प्रस्तुत कर मनुष्य के जीवन में शिक्षा के औचित्य उसकी जरूरत व आधुनिक परिवेश में उसकी सार्थक होती व्यवस्था पर चिंतन के साथ विमर्श करते हुए अपनी रायशुमारी की। मौके पर छात्रों के मुख से मनुष्य के जीवन में शिक्षा के महत्व व उसकी सामाजिक, राजनीतिक व देशस्तर पर बढ़ती जरूरत के बारे में विस्तारित विमर्श सुनकर ऐसा लगा मानों कॉलेज में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बस उसे निखारने की जरूरत है।

मुख्य अतिथि एनमुटा के महासचिव सह केएस कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो.अनिल कुमार सिंह ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते कहा कि ऐसे दौर में जब शिक्षक चुपचाप सेवानिवृत्त हो जाते हैं, बच्चों की ओर से ऐसा यादगार व शानदार आयोजन करना एक चमत्कार है। इससे भक्ति बाबू के शख्सियत का अंदाजा साफ झलकता है। कार्यालय सचिव कन्हैया, कार्यालय के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. रिजवानउल्लाह, कॉलेज के शिक्षक एमसी मिश्रा ने भी अपने डॉ. भक्तिनाथ झा के जीवन उपयोगी कार्यों पर प्रकाश डालते हुए अपने बच्चों का धन्यवाद देते कहा, बच्चे हमारे अनमोल रत्न हैं। वहीं, मौके पर डॉ. झा ने कहा कि आगे से जब भी बच्चों को हमारी जरूरत पड़ेगी हम उनकी हर जरूरत को पूरा करने को तत्पर रहेंगे।अपने कार्यकाल का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि आज के बच्चों का संबोधन सुनकर मैं बाग-बाग हो गया हूं। मुझे ऐसा लग रहा है कि मैंने अपना सफल जीवन कॉलेज में व्यतीत कर पुण्य का कार्य किया है।

वहीं, प्रधानाध्यापक डॉ. रहमतुल्ला ने कहा कि इल्म की दौलत सबसे बड़ी दौलत है। इल्म की दौलत जिसको मिल गई वही खुशनसीब है। इल्म आदमी को इंसान बनाता है। इल्म बांटने से नहीं घटता है, बल्कि इसमें बढ़ोतरी होती है। प्रधानाध्यापक डॉ. रहमतुल्लाह ने कहा, कहा कि जिस घर में इल्म की दौलत होती है वह घर जहालत के अंधेरों से हमेशा दूर रहता है। उन्होंने तालिबे इल्मों से दुनियावी इल्म के साथ दीनी इल्म हासिल करने पर भी जोर दिया। तालिबे इस्मों को मेहनत व लगन के साथ इल्म हासिल करना चाहिए। इल्म ऐसी दौलत है जिसे कभी इंसान से जुदा नहीं किया जा सकता। कहा कि जिसके घर में इल्म की दौलत होती है उसे घर में कभी जहालत का अंधेरा नहीं हो सकता।

प्रधानाध्यापक डॉ. रहमतुल्लाह ने अभिभावकों का आहवान करते हुए कहा कि उन्हें चाहिए कि वह अपने बच्चों को इल्म के लिए जगाएं। इल्म ही वह दौलत है जिससे आदमी हर मैदान में तरक्की व कामयाबी कर सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मौजूदा परिवेश में जिस तरीके से लगातार परिवर्तन हो रहे हैं हमारी जरूरत जिस तरीके से आधुनकिता से कमदताल मिला रहा है ऐसे माहौल में हमारे बच्चे मिसाल कायम कर रहे हैं जो हमारे लिए गौरव का क्षण है।समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।









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