Bihar Assistant Professor Recruitment: बिहार सरकार की सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 के विरोध में पटना में जारी आमरण अनशन सातवें दिन भी जारी रहा। पीएचडी धारक एवं शोधार्थी संघ, बिहार के बैनर तले गर्दनीबाग धरना स्थल पर आंदोलनकारी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग सहायक प्राध्यापक के पदों पर संविदा के बजाय स्थायी नियुक्ति की है, जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में स्थिरता आ सके।
नई नियमावली के प्रावधानों पर गहरा आक्रोश
आंदोलनकारियों ने नई नियमावली में अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष से घटाकर 43 वर्ष किए जाने पर तीव्र आपत्ति जताई है। उनका स्पष्ट कहना है कि इस बदलाव से लंबे समय से अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत अभ्यर्थियों के हित गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। संघ ने यह भी मांग की है कि सहायक प्राध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए। इसके साथ ही, चयन प्रक्रिया में तालिका 3-ए को लागू करने की अपील की गई है।
अतिथि शिक्षकों और शोधार्थियों के हितों पर कुठाराघात
आंदोलनकारियों ने शोध प्रकाशन और शिक्षण अनुभव को भी चयन प्रक्रिया में उचित महत्व देने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध कार्य करने वाले अभ्यर्थियों की योग्यता को चयन प्रक्रिया में पर्याप्त महत्व मिलना आवश्यक है। पीएचडी धारकों के लिए 30 अंकों का प्रावधान भी नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। संघ ने बिहार में नवस्थापित 211 डिग्री महाविद्यालयों में अतिथि शिक्षकों की पदस्थापना और उनकी सेवा के समायोजन की मांग भी रखी है। इसके अतिरिक्त, अतिथि शिक्षकों के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी सेवा नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
सरकार से स्थायी समाधान की मांग, आंदोलन जारी रहेगा
आमरण अनशन के सातवें दिन कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बिक्कू सिंह प्रधान प्रमुख रूप से धरना स्थल पर डटे रहे। संघ ने दोहराया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है कि बिहार में स्थानीय निवासी नीति लागू की जाए। साथ ही, सहायक प्राध्यापक समेत अन्य नियुक्तियों की प्रक्रिया हर साल तय समय पर पूरी करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि युवाओं को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
यह विरोध बिहार में उच्च शिक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों और अतिथि शिक्षकों की गहरी चिंताओं को उजागर करता है। एक ओर सरकार की नई नियुक्ति व्यवस्था है, तो दूसरी ओर आंदोलनकारी आयु सीमा, चयन के मानदंड, शोध और शिक्षण अनुभव तथा स्थायी नियुक्ति जैसे मुद्दों पर निर्णायक बदलाव की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल, गर्दनीबाग में यह आमरण अनशन जारी है और संघ ने अपनी मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है। सरकार पर अब इन गंभीर मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने और उचित समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया है, जिससे प्रदेश के हजारों शिक्षित युवाओं का भविष्य दांव पर है।







