
दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। अब दरभंगा बाल एवं पर्यवेक्षण गृह और विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के बच्चों की दुनिया बदलने वाली है। इस बदलाव की बुनियाद रख दी है डीएम Rajiv Roshan ने। बुधवार को डीएम राजीव रौशन ने निरीक्षण ही नहीं किया बल्कि वहां के बच्चों की पूरी दुनिया ही बदल दी। अब बच्चे विशेष उपकरणों से पढ़ेंगे भी, संगीत भी सिखेंगे और नियमित कैंपस में खेलेंगे भी। पढ़िए पूरी खबर






जिलाधिकारी राजीव रौशन की अध्यक्षता में जिला निरीक्षण समिति की ओर से दरभंगा जिले में संचालित बाल गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान का निरीक्षण किया गया।
किशोर न्याय अधिनियम-2015 के तहत यह निरीक्षण समिति प्रत्येक तीन माह पर बाल देख-रेख संस्थानों का निरीक्षण
करती है। जिलाधिकारी श्री रौशन के अलावा सिविल सर्जन, जिला शिक्षा पदाधिकारी, सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल संरक्षण पदाधिकारी, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति व अन्य कर्मी निरीक्षण में शामिल हुए।
सर्वप्रथम उन्होंने बाल गृह का निरीक्षण किया गया, जहां कुल 24 बच्चे आवासित पाए गए, जिनमें से 11 बच्चे विशेष इकाई के थे। जिलाधिकारी श्री रौशन ने बच्चों से बात कर वहां खान-पान, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली।
उन्होंने विशेष इकाई के बच्चों को पढ़ाने व सिखाने के लिए विशेष उपकरणों की मदद लेने का निर्देश दिया। साथ ही बच्चों
को नियमित रूप से बाहर कैंपस में खेलने के लिए निकालने का निर्देश दिया। उन्होंने संगीत-कला आदि का प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया।
पर्यवेक्षण गृह में निरीक्षण के समय बच्चे परिसर में कबड्डी खेलते हुए पाए गए। जिलाधिकारी ने एक-एक कर बच्चों के खेल
का आनंद लिया। गृह में 111 बच्चे आवासित पाए गए। जिलाधिकारी ने बच्चों से गृह में आने के पीछे के कारण को जानने की कोशिश की और उन्हें सही रास्ते पर चलने व भविष्य को सही दिशा देने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने अधीक्षक को बच्चों की आयु के अनुसार वर्गीकृत करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें टाइपिंग, कुकिंग, पेंटिंग आदि से जोड़ने का निर्देश दिया ताकि गृह से निकल कर वे अपना रोजगार शुरू कर सके। जिला शिक्षा पदाधिकारी को गृह में संगीत शिक्षक की प्रतिनियुक्त करने का निर्देश दिया गया।
ख्वाजा सराय स्थित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के निरीक्षण में दो बच्चियाँ आवासित पाई गई। यह संस्थान कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने के लिए सरकार द्वारा अधिकृत है। इसके अलावा अस्पताल या किसी अन्य साधन से बच्चों को गोद लेना अवैध एवं दंडनीय है।









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