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प्रकृतिवाद, यथार्थवाद, प्रतिवाद, संरचनावाद, विसंगतवाद, आधुनिकतावाद की जड़ में आज का रंगमंच

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प्रकृतिवाद, यथार्थवाद, प्रतिवाद, संरचनावाद, विसंगतवाद, आधुनिकतावाद की जड़ में आज का रंगमंचप्रकृतिवाद, यथार्थवाद, प्रतिवाद, संरचनावाद, विसंगतवाद, आधुनिकतावाद की जड़ में आज का रंगमंचदरभंगा, देशज टाइम्स। विश्वविद्यालय संगीत व नाट्य विभाग में बुधवार को विश्व रंगमंच दिवस पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। विशेषज्ञ थे, संतोष राणा।विषय था,वैश्विक संदर्भ में रंगमंच। कार्यक्रम का आरंभ आगत अतिथियों ने दीप-प्रज्वलन के साथ  किया। विभागाध्यक्ष प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने विषय-विशेषज्ञ को मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग,चादर व पुष्पगुच्छ से सम्मानित किया। मंच-संचालन सुनीता कुमारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन साधना श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में विभाग के छात्र-छात्राओं सहित विभाग के शिक्षकों में प्रो. पुष्पम नारायण, डॉ.वेद प्रकाश, डॉ. सुनील कुमार ठाकुर,शिव नारायण महतो, हेमेंद्र कुमार लाभ, विजय Image result for विश्व रंगमंच दिवस

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Image result for विश्व रंगमंच दिवस कुमार साह उपस्थित थे। विषय विशेषज्ञ  संतोष राणा ने कहा कि 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1961 में इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट ऑफ़ यूनेस्को के सहयोग से रंगमंच के मूल्य और महत्व को समाज में स्थापित करने बढ़ावा देने और वैश्विक रंगमंच में आपसी तालमेल विकसित करने के लिए विश्व रंगमंच दिवस की घोषणा 27 मार्च को किया गया। विश्व रंगमंच का जन्म समाज और संसार में व्याप्त बुराइयों  से लड़ने के लिए हुआ है।भारत में ब्रह्मा के ज्ञान के प्रतीक चारों वेदों के अंशों को लेकर पंचम वेद का निर्माण किया जो  नाट्यवेद है।प्रकृतिवाद, यथार्थवाद, प्रतिवाद, संरचनावाद, विसंगतवाद, आधुनिकतावाद की जड़ में आज का रंगमंच जापानी मिथक के अनुसार सूर्य की देवी जब नाराज होकर गुफा में छुप गई तब दुनिया में अंधकार छा गया था। इस अंधकार को दूर करने के लिए एक दूसरी देवी ने गुफा के बाहर नृत्य व अन्य आंगिक चेष्टा करने लगी। धीरे-धीरे सभी देवता शामिल हुए। उन्हें देखने के लिए सूर्य की देवी बाहर निकली और यहीं से नाटक की उत्पत्ति हुई। जापान की इस कथा में भी अंधकार दूर करने के लिए रंगमंच Related image आरंभ हुआ। 534 ईसा पूर्व से लेकर आज तक   रंगमंच का मूल अर्थ संसार में व्याप्त बुराइयों से लड़ना रहा है। इस क्रम में अनेक प्रकार के वादों का जन्म हुआ जैसे प्रकृतिवाद,यथार्थवाद, प्रतिवाद, संरचनावाद, विसंगतवाद, उत्तर आधुनिकतावाद। यह व्याख्यान विभाग के छात्र-छात्राओं के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुआ।प्रकृतिवाद, यथार्थवाद, प्रतिवाद, संरचनावाद, विसंगतवाद, आधुनिकतावाद की जड़ में आज का रंगमंच

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