देखों देखों चुनाव का मौसम..रहना सब सावधान,भयमुक्त समाज का सपना लेकर कुछ नेता आएंगे। हाथ जोड़े दांत निपोड़े घिघियाते हुए चरण छूकर जाएंगे, चिकनी-चुपड़ी बातों में हम सबको भड़माने आएंगे। देखो-देखो चुनाव का मौसम…रहना सब सावधान। दो-चार लुभावने वादे करके संसद में जाएंगे, युधिष्ठिर धर्मराज बन शास्त्र वाचने आएंगे, मिलते ही सिंहासन वो धृतराष्ट्र बन जाएंगे, फिर हम जन गण के नेता को पांच बरस ढूंढ न पाएंगें। रहना सब सावधान… चुनावी मौसम है वो जरूर आएंगे।
वो आए तो आए हम सब हैं सावधान, अनुभव व चरित्र देखकर नेता हम चुनेंगे महान, दुष्ट-दस्यु के होश उड़ा दे जैसे थे राज पृथ्वी चौहान, कूटनीति राजनीति में हो ऐसे जैसे चाणक्य विद्वान,विजय-पताका लहराए जैसे हो अशोक महान,वो आए तो आए…हम सब हैं सावधान।बच्चा-बच्चा योद्धा महाबली हो। ज्ञान पुंज-प्रकाश में जैसे रिसीवर पतंजलि हो। सुधर्म निभाए जो वो नेता वचनवली हो। नवक्रांति के दीप जला दे वो नेता हर घर-गली हो।
पारस सिन्हा,दरभंगा








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