दरभंगा, देशज टाइम्स। मिथिला की बेटी, जनकनंदनी, जनक की दुलारी, हमारी मां, जनक जननी मां सीते तेरी जय हो। तेरी गाथा हमारा संबल है। तेरी पवित्रता हमारी ताकत है। तू जग जननी है। तू मेरी हमसब की माता है। ऐसी मां, हमारी मां को मिथिला के पारंपारिक गीत समदाउन के साथ विदा किया गया। DESHAJ TIMES
शिव धनुषधारिणी वीर माता भगवती सीता रविवार को विदा हो गई। मौके पर भगवती सीता की खोंइछा भरकर भक्त उनसे आशीर्वाद लेते दिखे। बाद में जयकारों के बीच भगवती की प्रतिमा को जल में विसर्जित कर दिया गया। इसके साथ ही छह दिवसीय जानकी उत्सव का समापन हो गया। इससे पूर्व सुबह में शास्त्री परंपरा के अनुसार भगवती की पूजा-अर्चना की गई। DESHAJ TIMES
देवी-देवताओं के साथ भगवती सीता की विसर्जन-विधि मंत्रोच्चार के साथ पूरी की गई। फिर मिर्जा खां तालाब में मूर्ति विसर्जित की गई। इससे पूर्व लौकिक परंपरा के अनुसार भगवती का छठिहार उत्सव मनाया गया। सीता-भक्ति गीतों के संग मां की पूजा-अर्चना की गई।








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