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बिहार में आज से बदल गया जमीन रजिस्ट्री का नियम, फीफो शुरू, दाखिल-खारिज में इन्हें मिलेगा फायदा

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बिहार में आज से जमीन रजिस्ट्री का नियम बदल गया है। अब बिहार में फीफो और ऑड-इवन नियम शुरू हो गया है। यह बदलाव प्रदेश के सभी 543 अंचलों में लागू हो गया है। अब राज्य के अंदर दाखिल -खारिज के वादों के तेजी से निपटारा किया जाएगा। इसे फर्स्ट इन फर्स्ट आउट (फीफो) और ऑड-इवन नियम के साथ किया जा रहा है।

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इसके तहत पूर्व की तरह ही सीओ के पास म्यूटेशन दिया जाएगा। इसके बाद सीओ इसे राजस्व कर्मचारी को जांच के लिए देंगे। फिर राजस्व कर्मी जांच कर अपने मंतव्य के साथ वाद को राजस्व पदाधिकारी के यहां अग्रसारित करेंगे। पढ़िए कैसे होगा जमीन रजिस्ट्री और कैसे होगा दाखिल खारिज…

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जानकारी के अनुसार,  राज्य के अंदर हर महीने बीस फीसदी मामले लंबित रह जा रहे थे। जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि अंचल के पदाधिकारी पहले प्राप्त हुए वाद का निस्तारण बाद में कर रहे थे। इसी के निपटारे के लिए  राजस्व पदाधिकारी को अंचलाधिकारी की शक्ति प्रदान की गयी हैं।

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साथ ही साफ्टवेयर अपडेट किया गया है। पटना जिले के फतुआ, भागलपुर के सबौर, समस्तीपुर के कल्याणपुर , किशनगंज के ठाकुरगंज और सीवान जिले के सीवान सदर अंचल में पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद सभी अंचलों में इसे लागू कर दिया जायेगा।

इस नीति के मुताबिक राज्य के अंदर अंचल में म्यूटेशन के लिए जो पहले आएगा उसका काम पहले निपटाया जाएगा। जिससे म्यूटेशन के लिए ज्यादा समय नहीं लगेगा। अब ऑड-इवन नियम की बात करें तो इसमें अंचलाधिकारी ऑड नंबर वाले हल्का और राजस्व पदाधिकारी इवन नंबर वाले हल्का के दाखिल खारिज वादों का निपटारा करेंगे।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सॉफ्टवेयर को अपडेट कर नयी व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर राज्य की पांच अंचलों में लागू किया है।

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अब चल में म्यूटेशन के लिए आवेदन पहले की तरह सीओ के पास दिया जायेगा। उसके बाद सीओ इसे राजस्व कर्मचारी को जांच के लिए देंगे। फिर राजस्व कर्मी जांच कर अपने मंतव्य के साथ वाद को राजस्व पदाधिकारी के यहां अग्रसारित करेंगे। वाद यदि विषय संख्या (ऑड नंबर) वाले हल्का का है, तो राजस्व पदाधिकारी राजस्वकर्मी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन पर अपना मंतव्य देकर वाद को सीओ के यहां निर्णय के लिए अग्रसारित करेंगे।

सीओ के लॉगिन में वाद दिखने लगेगा। विषम संख्या वाले हल्का का वाद होने पर राजस्व कर्मचारी खुद को आगे बढ़ाएंगे। सीओ के रूप में मिली शक्ति का उपयोग करते हुए उसका निस्तारण करेंगे। इस नयी व्यवस्था में राजस्व पदाधिकारी को अग्रसारित और निस्तारित दो लेयर की जिम्मेदारी निभानी होगी।

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