Bihar Vigilance Action: बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ निगरानी विभाग का अभियान तेज हो गया है। इसी कड़ी में बुधवार सुबह निगरानी विभाग की टीम ने वेतन आयोग के अवर सचिव आमोद मिश्रा को ₹20,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित इस्कॉन मंदिर के पास वेतन आयोग कार्यालय में की गई, जिससे सरकारी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
रिश्वतखोरी का पूरा मामला क्या है?
आमोद मिश्रा मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के वेतन कोषांग शाखा में अवर सचिव के पद पर कार्यरत हैं। जानकारी के अनुसार, एसबीएम कॉलेज, बिहारशरीफ में कार्यरत उमाशंकर उमरेबी के पिता प्रयोग प्रदर्शक के तौर पर सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद करीब ₹17 लाख का एरियर भुगतान लंबित था। इस एरियर को पास कराने के एवज में आमोद मिश्रा ने ₹30,000 की रिश्वत की मांग की थी।






पीड़ित उमाशंकर उमरेबी ने 30 जून को निगरानी थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बातचीत से संबंधित सभी साक्ष्य भी विभाग को सौंपे। शिकायत के सत्यापन के दौरान सामने आया कि आरोपी अधिकारी पहले ही ₹10,000 रिश्वत ले चुका था। बाकी ₹20,000 की रकम देने के लिए पीड़ित को बुधवार शाम को ऑफिसर्स फ्लैट गर्दनीबाग बुलाया गया था।
निगरानी विभाग ने कैसे बिछाया जाल?
शिकायत की पुष्टि होते ही निगरानी विभाग ने एक विशेष टीम का गठन किया और आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। बुधवार शाम को रुपए देने से ठीक पहले निगरानी की टीम पूरी तरह अलर्ट पर थी। तय योजना के तहत जैसे ही आमोद मिश्रा ने ₹20,000 की रिश्वत स्वीकार की, टीम ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया।
गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम आरोपी अवर सचिव आमोद मिश्रा से गहन पूछताछ कर रही है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी जारी है। निगरानी विभाग की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से सरकारी महकमे में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश गया है।








