दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। कमेश्वरसिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय 26 जनवरी को अपना स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। इस अवसर को ऐतिहासिक बनाने के लिए अबकी बार महामहिम कुलाधिपति के समक्ष राजभवन में ही एक दिवसीय शास्त्रार्थ करने की योजना है। इसको लेकर विश्वविद्यालय में कवायद जोरों से चल रही है। पटना में शास्त्रार्थ किस तिथि को आयोजित होगी यह राजभवन से तय होने के बाद ही क्लियर हो पाएगा। यह जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने देशज टाइम्स को बताया कि विभागाध्यक्षों व वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक बैठक कुलपति प्रो. सर्व नारायण झा की अध्यक्षता में गुरु़वार को हुई और स्थापना दिवस के सारे कार्यक्रमों को यादगार बनाने के लिए गहन मंथन चला। साथ ही निर्णय लिया गया कि सभी विभागों में जनवरी से मार्च के बीच कम से कम तीन तीन कार्यशालाओं को आयोजित किया जाए। इसमें बाहर के विशिष्ट विद्वानों को भी बुलाने पर सहमति बनी।
छप्पन भोग की भी होगी व्यव्यस्था
बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय यह हुआ कि राजभवन में शास्त्रार्थ तो होगा ही तथा इसके साथ-साथ मिथिला के सुस्वादु छप्पन भोग का भी मगध में अतिथियों को स्वाद चखाया जाएगा। यानी कि मिथिला के चर्चित व्यंजनों के साथ-साथ यहां के विद्वानों को विशिष्ट अतिथि सीधे जान पाएंगे। पिछले दिनों दीक्षांत समारोह के मौके पर महामहिम व खास अतिथियों को परोसे गए छप्पन भोग काफी चर्चित रहा था और सभी ने उसकी प्रशंसा भी की थी।
चार विषयों में होगा शास्त्रार्थ
फिलहाल तय हुआ है कि राजभवन में साहित्य,वेद,व्याकरण व ज्योतिष विषयों पर संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्वानों व छात्रों के बीच एक दिवसीय शास्त्रार्थ कार्यक्रम तय मानकों पर होगा। विषयवार विद्वानों के चयन पर भी आज चर्चा हुई। शास्त्रार्थ के टॉपिक पर मंथन हुआ। कुलपति प्रो. झा ने साफ कहा कि विषय, भाषा, उपस्थापन व शास्त्रार्थ की विधियों पर खास तवज्जो दी जाएगी। जो लोग संस्कृत नहीं समझ पाएंगे उनके लिए हिंदी में अनुवादक की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा स्थापना दिवस के अवसर पर 24, 25 व 26 जनवरी को मुख्यालय में भी शास्त्रार्थ के अलावा अन्य सांस्कृतिक गतिविधिया भी होंगी।

मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री भी रहेंगे मौजूद
राजभवन में आयोजित होने वाले शास्त्रार्थ कार्यक्रम में सूबे के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री के अलावा सरकार के कई आलाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम को एकदम खास बनाने के लिए पूरी कोशिश होगी कि सारी गतिविधियां इन्हीं विशिष्टजनों के समक्ष सम्पादित हो। यानी कि कार्यक्रम की महत्ता को ऐतिहासिक पहचान दिलाने में कोई कसर नहीं रखा जाएगा। कुलपति प्रो. झा ने कहा कि अभी अतिथियों से संपर्क किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय को मोलेगी नई पहचान
राजभवन में शास्त्रार्थ होने से बेशक संस्कृत विश्वविद्यालय व इसके विद्वानों को राष्ट्रीय क्षितिज पर एक नायाब पहचान मिलेगी। मिथिला में शास्त्रार्थ की पुरानी परंपरा रही है जो अब विलुप्त हो चुकी है। ऐसे में पटना के बृहत पटल पर इसके आयोजन से संस्कृत की समृद्धि होगी और विद्वानों के विचार राष्ट्रीय स्तर पर सुने जाएंगे। विश्वविद्यालय का भी व्यापक पैमाने पर ब्रांडिंग होगा और खत्म हो चुकी परंपरा को भी एक नया ऑक्सीजन मिलेगा। आज की बैठक में कुलपति के अलावा प्रो. शिवाकांत झा, प्रो. सुरेश्वर झा, प्रो. श्रीपति त्रिपाठी, प्रो. शशिनाथ झा,डॉ. शिवलोचन झा, डॉ पवन कुमार झा,डॉ. हरेंद्र किशोर झा,डॉ. विद्येश्वर झा, डॉ. मीना शास्त्री, डॉ. नवीन कुमार झा, कर्नल नवीन कुमार, एफए मंतोष मालाकार मुख्य रूप से उपस्थित थे।








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