डॉ. सिंह ने कहा है कि जीतनराम मांझी ने महागठबंधन के नेताओं के सामने घुटने टेक दिए और हमारे जैसे समर्पित कार्यकर्ता एवं वरीय उपाध्यक्ष को एक सीट नहीं दिला पाये। डॉ. सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि मैं पार्टी के स्थापना काल से साधारण कार्यकर्ता के रूप मे आपके प्रति समर्पण भाव से काम करता आ रहा हूं और अपनी क्षमता के अनुसार पार्टी को हर स्तर पर संगठित करने का प्रयास किया है। शायद हमारी क्षमता को देखकर ही हमें पार्टी के वरीय राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में काम करने का मौका मिला है।
उन्होंने कहा कि आज लोकसभा चुनाव सामने है और मैं पिछले 36 वर्षों से राज्य के हर जिले की सेवा करता आ रहा हूं। खासकर महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र से महागठबंधन के प्रत्याशी के रूप में मैं चुनाव लड़ा है और मुझे तीन लाख से अधिक वोट मिले। उसके बाद से महागठबंधन ने हमें कभी दोबारा लड़ने का मौका नहीं दिया,जो दुःखद है। मैंने हर हाल में महाराजगंज से चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की लेकिन अभी तक कोई खास प्रगति हमें या महाराजगंज के मतदाताओं को नहीं दिख रही है। इससे मैं काफी आहत एवं असहज महसूस कर रहा हूं। डॉ. सिंह ने कहा कि जीतनराम मांझी देश के बड़े दलित नेता हैं लेकिन महागठबंधन के नेताओं ने इन्हें दलित समझकर इन पर दबाव बनाया और बाहरी प्रत्याशी देने पर मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि लेकिन हमलोग जीतनराम मांझी के साथ हैं और साथ रहेंगे। डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य की जनता की भावना,पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावना एवं हर दल में काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावना को देखते हुए मैं पार्टी के वरीय राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं और एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में पार्टी की सेवा करने का मन बनाया है।








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