अविनाश कुमार महथा, हायाघाट। पूरे देश में स्वच्छता अभियान चल रह है। वहीं, हायाघाट रेलवे स्टेशन इसके मतलब से अंजान खुद में कचरों को समेटे सामने दिख रहा है। स्टेशन पर प्रवेश करते ही यात्रियों को गंदगी व कचरे स्वागत करते हैं। उसी के बीच इन्हें गुजरना पड़ता है।
रेलवे स्टेशन परिसर में जगह-जगह लगे कूड़े कचरों के ढेर ने स्वच्छता अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे के अधिकारियों की लापरवाही, स्थानीय प्रतिनिधियों की खामोशी, उस अभियान की धज्जियां उड़ा रहे हैं जिसके बूते आज के प्रधानमंत्री देश को विश्व गुरु बनता देख रहे हैं।
वर्ष 2014 में स्टेशन परिसर में जोर-शोर से स्वच्छता अभियान चलाया गया था। आज यहां गंदगी का साम्राज्य कायम है। वहीं, हायाघाट प्लेटफार्म पर पेयजल के संकट से जूझ रहे यात्री…. व चारों ओर की गंदगी सवाल-दर-सवाल सामने हैं। यात्रियों के पेयजल की यहां कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। इससे यात्री इस भीषण गर्मी में बिलबिला रहे हैं।
वहीं, इधर-उधर भटकने की मजबूरी दिखती है। ऊपर से गंदगी से विभिन्न प्रकार की बीमारियों की भी आशंका बनी रहती है। यात्रियों को स्टेशन की दुर्गंध के कारण नाक दबा कर ही निकलना पड़ता है। इसके अलावा परिसर में साफ-सफाई का अभाव स्वच्छता अभियान पर स्पष्ट रूप से प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। सरकार की ओर से इस अभियान पर काफी राशि खर्च की जा रही है। मगर, रेलवे स्टेशन का यह हाल अभियान के उद्देश्य विफल करार दे रहा है।
प्रखंड प्रमुख बेवी देवी, मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष विजय पासवान, मो.नासीर,सरोज कुमार सिंह, रंधीर झा, मो.नदीम, मो.नासीर, जगदीश प्रसाद, मो.समांनजर, मो.सादाब का कहना है, गंदगी का अंबार है। लोग बीमार पड़ रहे हैं। साथ ही दुर्गंध रहने से आने-जाने में भी बहुत परेशानी होती है। अधिकारी, जनप्रतिनिधि स्वंयसेवी सस्थाओं से जुटे लोगों ने अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। अधिकारी भी हाथ मे झाडू लेकर सड़क पर घूमते दिखे थे, लेकिन वक्त गुजरते ही सब कुछ भूल गए।
जब देशज टाइम्स ने यही सवाल स्टेशन मास्टर मदन कुमार गुप्ता से किया तो उनका जवाब सुनिए, उन्होंने बताया, समस्या का हल जल्द ही किया जाएगा। इसपर सीधा सवाल रंधीर झा ने दागा, कहा, स्टेशन मास्टर भी टाल-मटोल का रवैया अपना रहे हैं। यह इलाके व रेलवे के लिए शुभ संकेत नहीं।








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