दरभंगा, देशज टाइम्स। लनामिवि के दीक्षांत समारोह के बहाने राज्यपाल लालजी टंडन ने केंद्र व प्रदेश की सरकार का आगामी चुनावी एजेंडा अघोषित रूप से घोषित कर दिया। जिस राष्ट्रवाद के नाम पर केंद्र की मोदी सरकार लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही है उसे युवाओं व मिथिला खासकर दरभंगा की भूमि से उसका जयघोष करते हुए पूरी तरह चुनावी भाषणों को शैक्षिणिक परिवेश से डिलेवर कर दिया। कहा कि, भारतीय राष्ट्रवाद ने एक भिन्न मार्ग चुना है। यह समूची मानवता के हित व उसकी सेवा के लिए स्वयं को संगठित करना चाहता है। हमारा राष्ट्रवाद वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर आधारित है, जो सर्वे भवंतु सुखिन: में विश्वास करता है। इसलिए हमारी राष्ट्रीयता हमें विश्वमैत्री का पाठ पढ़ाती है।
कहा, आज का भारत नई ऊर्जा और पराक्रम से भरा हुआ है। हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वैभव का पुन: उत्थान हो रहा है। युवाओं में राष्ट्रीयता की उद्दाम लहरें प्रवाहित हो रही हैं। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमलों को प्रतिकार करते हुए देश ने अपने प्रचंड पौरूष को प्रकट किया है। आतंकवाद के खिलाफ हमारे संघर्ष को पूरी दुनिया ने समर्थन दिया है। राज्यपाल ने कहा कि आतंकवाद विश्व के अधिकतर देशों के लिए एक विकट समस्या बना हुआ है। इसे समूल उखाड़ फेंकने के लिए हमारी प्रतिबद्धता जगजाहिर है। हमारी युवा शक्ति, सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय एकता इस चुनौती से निबटने में काफी मददगार है। पूरे विश्व की नजर आस्था और विश्वास के साथ भारत पर टिकी है। हमारी सांस्कृतिक विरासत आज अक्षुण्ण बनी हुई है तो इसके पीछे हमारी वसुधैव कुटुंबकम की उदार मैत्री भावना ही है।
कहा कि, आज का भारत नई ऊर्जा और पराक्रम से भरा हुआ है। हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वैभव का पुन: उत्थान हो रहा है। युवाओं में राष्ट्रीयता की उद्दाम लहरें प्रवाहित हो रही हैं। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमलों को प्रतिकार करते हुए देश ने अपने प्रचंड पौरूष को प्रकट किया है। आतंकवाद के विरुद्ध हमारे संघर्ष को पूरी दुनिया ने समर्थन दिया है। यह सब संभव हुआ है हमारे युवाओं की राष्ट्रभक्ति में अटूट निष्ठा के कारण। राष्ट्रवाद हमारा राष्ट्रधर्म बनता जा रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का कथन है-राष्ट्रवाद बुरी चीज नहीं है। बुरी है संकुचित मनोवृति, स्वार्थपरता और ऐकांतिकता, जो आधुनिक राष्ट्रों के विनाश के लिए उत्तरदायी है। मौके पर कई लोगों ने राज्यपाल के भाषण पर एक दूसरे से पूछा आखिर शैक्षणिक मंच से आतंक का मतलब समझ से परे। क्या यह राजनीति मंच था। चुनाव से पूर्व सियासी भाषणों में लिपटी पोस्टरबाजी या फिर मोदी-नीतीश सरकार की आगामी चुनाव के घोषणा पत्र का वाचन। 








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