दरभंगा, देशज टाइम्स। यूं तो दरभंगा समेत इस जिले में अनगिनत कोचिंग सेंटर हैं जो छात्रों को उनके बेहतरी का सपना दिखाते हैं लेकिन क्या अभिभावकों ने सोचा आप जहां अपने पाल्यों को भेजकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरी का रास्ता चुनते हैं वो संस्थान कितना काबिल, उसके शिक्षक कितने योग्य हैं। शायद नहीं, हम ले चलते हैं और मिलाते हैं आपको उस कोचिंग संस्थान से जहां से निकलकर बच्चे होनहार होने का तमगा लगाए बेहतरी के साथ अपनी तरक्की का रास्ता आज खूब चुन रहे हैं। जी हां यहां बात हो रही है केवटी स्थित चाणक्य इंस्टीच्यूट प्वाइंट की। केवटी प्रखंड के दानी पंचायत स्थित चाणक्य इंस्टीच्यूट प्वाइंट ने हर बार की तरह इसबार और उन्नत तरीके से इंटर परीक्षा में अपनी शानदार रिजल्ट से अभिभावकों का चहेता बन चुका है।
इसके निदेशक, प्रोप्राइटर ललित कुमार की योग्यता, कठिन श्रम, बच्चों के साथ दोस्ताना संबंध, पढ़ाई के प्रति एकाग्रता के बूते इस ग्रामीण परिवेश में रहकर भी यहां पढ़ने वाले छात्रों ने इसबार इंटर की परीक्षा में शानदार, बेहतरीन अंक लाकर ना सिर्फ अपने गांव, अपने अभिभावकों बल्कि दरभंगा ही नहीं संपूर्ण मिथिलांचल में अपनी धाक जमाई है। यहां के छात्रों ने उत्कृष्ठ अंक लाकर तरक्की का रास्ता खुद चुन लिया है जिसका श्रेय चाणक्य इंस्टीच्यूट प्वाइंट के निदेशक ललित कुमार को जाता है जिनकी व्यवहार कुशल मार्गदर्शन ने ग्रामीण परिवेश में शिक्षा का हब बना दिया है। यहां के सफल छात्र आज अपनी सफलता से गदगद हैं। वहीं, अभिभावकों की खुशी देखी नहीं जा रही।
यह है चाणक्य इंस्टीच्यूट प्वाइंट की विशेषता
हर कोई कामयाब होने का सपना देखता है पर आपने गौर किया होगा की सपने बहुत कम लोगों के पूरे हो पाते है। कई उदाहरण आपको ऐसे मिल जायेंगे जो कामयाबी के लिए सबकुछ करते है जैसे अच्छी शिक्षा , बेहतर समझ , कर्मठता और संसाधनों का उपयोग पर फिर भी विफलता हाथ लगती है। ऐसा क्यों होता है कभी सोचा है आपने अगर नहीं तो आईये आज सोच भी लीजिये और जान भी लीजिये की हम ऐसी कौन सी कमियाँ कर जाते है की अपनी तरह से 100 प्रतिशत देने के बाद भी हम अपने सपने पूरे नहीं कर पाते।छात्रों को दिखाया जाता बेहतरी, तरक्की का रास्ता
जीवन में वही व्यक्ति आगे बढ़ता है, जो अपने जीवन में कुछ कठोर निर्णय लेता है। कुछ लोगों के निर्णय उन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जाते हैं तो कभी−कभी गलत निर्णय के कारण आपको सबकुछ शुरू से शुरू करना पड़ता है। लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं है कि हार के डर से व्यक्ति निर्णय लेना ही छोड़ दें। असमंजस की स्थिति में व्यक्ति किसी निर्णय पर नहीं पहुंचता और कुछ अच्छे अवसर उसके हाथ से छूट जाते हैं। इसलिए बाद में पछताने से अच्छा है कि आप खुद पर भरोसा करें और हिम्मत करके कुछ जटिल निर्णय लेना भी सीखें।
कड़ी मेहनत, लक्ष्य पर निशाना ही हमारा मकसद : ललित कुमार
कड़ी मेहनत और बहुत सारा समय लगाकर काम करने के बावजूद, सफल नहीं होने के पीछे एक कारण अपने काम का आकलन नहीं करना होता है। जबकि सफल व्यक्ति अपने हर एक छोटे-बड़े निर्णय की प्रतिक्रियाओं का आकलन करते हैं, सलाह लेते हैं, ग़लतियों पर गौर करते हैं और उनके अनुसार आगे की रणनीति बनाते हैं।








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